Mukhyamantri Majhi Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना के लिए 4 जुलाई से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। पिछले महीने 1.4 करोड़ आवेदन प्राप्त किए गए, जिसमें से 92 प्रतिशत यानी 1.3 करोड़ आवेदनों को मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना के लिये पात्र पाया गया। बता दें कि इस योजना की घोषणा सरकार ने बजट पेश करने के दौरान की थी। इस योजना के तहत वांछित महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। आइए आपको बताएं किन्हें मिलेगा योजना लाभ, किस जिले की महिलाओं ने किया सबसे अधिक आवेदन।
महिलाओं को मिलेगा ये लाभ
मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना के माध्यम से विवाहित,तलाकशुदा, विधवा, परित्यक्त (Deserted) और निराश्रित महिलाओं को प्रति माह महाराष्ट्र सरकार द्वारा 1,500 रुपये का वजीफा दिया जाएगा। इसके लिए महिलाओं के परिवार की पारिवारिक वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। वह राज्य की निवासी होनी चाहिए। उम्र की बात करें तो इस योजना का लाभ केवल 21 साल से 65 साल की महिलाओं को मिल सकेगा, जिन्होंने योजना के लिए आवेदन किया है।
इस योजना पर आधारित है महाराष्ट्र की ये योजना
जानकारी के लिए बता दें महाराष्ट्र की मझी लड़की बहिन योजना मध्य प्रदेश की लाडली बहन योजना पर आधारित है। मध्य प्रदेश में इस योजना के 2.5 करोड़ लाभार्थी है। इस योजना को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने भी मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना की शुरुआत की। माना जा रहा है कि अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में ये गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
योजना के सबसे अधिक पात्र पुणे से
महाराष्ट्र के पुणे जिले में इस योजना के लिए आवेदन करने वाले और योजना के पात्र उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक है। यहां 8.9 लाख महिला योजना की पात्र हैं। वहीं नासिक में 7 लाख, कोल्हापुर और अहमदनगर में 6.5 लाख, सोलापुर में 5.5 लाख है। सबसे कम योजना के पात्र उम्मीदवार गढ़चिरौली, सिंधुदुर्ग शहर में है। लेकिन इस योजना से सरकार पर 46,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का बोझ बढ़ने की उम्मीद है।
एक अधिकारी ने बताया कि महिलाओं द्वारा आवेदन की संख्या इसलिए सबसे अधिक है, क्योंकि विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा निर्वाचन क्षेत्रों में महिलाओं को बढ़-चढ़कर आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विपक्ष पर निशाना साधा और उन पर डबल स्टैंडर्ड का आरोप लगाया। मंत्री का कहना है कि एक तरफ तो नेता महिलाओं को योजना में पंजीकरण कराने में सहायता कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ योजना की आलोचना कर रहे हैं।
