बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद बीएमसी ने पहली बार गणपति मूर्तियों के Plaster of Paris (PoP) अवशेषों को रिसाइकल करने की पहल शुरू की है।इस साल गणेश विसर्जन के बाद शहर से कुल 1,982 मीट्रिक टन PoP अवशेष एकत्रित किए गए। बीएमसी ने इन अवशेषों को ढोने के लिए 436 वाहनों का इस्तेमाल किया और इन्हें भिवंडी स्थित recycle and dispose facility पहुंचाया गया है।रिसाइकल के वैज्ञानिक तरीके खोजने के लिए bmc ने 12 संस्थानों से मदद मांगी है, जिनमें IIT बॉम्बे और VJTI भी शामिल हैं।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और बीएमसी मिलकर अब इन प्रस्तावों पर चर्चा करेंगे और सबसे उपयुक्त तरीका अपनाएंगे।
इस पहल का मकसद न केवल पानी को प्रदूषण से बचाना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि हवा में भी जहरीले तत्व न फैलें।बीएमसी का कहना है कि यह कदम भविष्य में गणेशोत्सव को और अधिक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।
हर साल मूर्ति अवशेषों को दफनाया जाता?
पिछले साल तक, BMC कर्मचारी विसर्जन के बाद बीच या तट पर आई मूर्तियों को फिर से गहरे समुद्र में विसर्जित कर देते थे या कुछ निवासी उन्हें दफना देते थे। कोई विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) नहीं थी। इस वर्ष से, BMC उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए एसओपी निर्धारित किए हैं।
PoP अवशेषों को एकत्रित करने एजेंसी की हुई नियुक्ति
BMC के नए SOP के मुताबिक, 12 घंटे की शिफ्ट और स्थल तक की दूरी को ध्यान में रखते हुए, शहर और पश्चिमी उपनगरों से पीओपी मूर्तियों के अवशेष ले जाने वाले ठेकेदारों को प्रति 100 किलोमीटर 9,628 रुपये का भुगतान किया जाएगा।पूर्वी उपनगरों के ठेकेदारों को 80 किलोमीटर के लिए 8,788 रुपये का भुगतान किया जाएगा। पीओपी मूर्तियों के अवशेष कृत्रिम तालाबों और प्राकृतिक जल निकायों, दोनों से एकत्र किए जाएँगे।
