मुंबई

Mumbai: GRP के सामने पति ने पत्नी का चाकू से काटा गला, रेलवे स्टेशन पर दिन दहाड़े हत्या की कोशिश

विरार रेलवे स्टेशन पर दिनदहाड़े पति ने पत्नी की हत्या करने की कोशिश की। घरेलू विवाद में आरोपी ने महिला के गले पर चाकू से वार कर जान लेने का प्रयास किया।

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विरार स्टेशन पर चाकूबाजी

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

मुख्य बातें

  • विरार रेलवे स्टेशन पर खून-खराबा
  • पति ने पत्नी पर चाकू से किया हमला
  • घरेलू विवाद में हत्या की कोशिश

मुंबई के विरार रेलवे स्टेशन पर बुधवार की सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। यहां एक शख्स ने अपनी पत्नी पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। आरोपी ने भीड़ के बीच दुस्साहस दिखाते हुए चाकू से पत्नी के गले पर हमला कर दिया। गला कटने से खून की धार बहने लगी। इसी दौरान घटनास्थल से चंद कदम पर मौजूद जीआरपी के सिपाहियों ने महिला को किसी तरह बचाकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया।

ब्रिज पर चाकूबाजीदरअसल, सुबह के वक्त यात्री विरार स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान ब्रिज से चीखने-चिल्लाने की आवाज आने लगी। लोगों ने दौड़कर देखा तो एक शख्स अपनी पत्नी का गला घोटने की कोशिश कर रहा था। जब वो महिला छटपटाकर भागने लगी तो आरोपी ने उसके गले पर चाकू से वार कर दिया, जिससे उसका गला काफी हद तक कट गया। उसी दौरान जीआरपी के जवानों ने आरोपी के चंगुल से महिला को बचाकर आनन-फानन में संजीवनी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज किया जा रहा है। महिला को काफी गंभीर चोट आई हैं।

पारिवारिक विवाद में हत्या की कोशिश

वारदात सुबह 7:30 बजे विरार स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक के ब्रिज पर हुई । जानकारी में पता चला है कि यह हमला पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद का था। आरोपी का नाम शिवा शर्मा और घायल पत्नी का नाम वीरशीला शर्मा है। फिलहाल, आरोपी को रेलवे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और पूछताछ जारी है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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