मुंबई

ब्राह्मण समुदाय पर कमेंट मामले में अनुराग कश्यप की बढ़ी मुश्किलें, मुंबई पुलिस में दर्ज हुई शिकायत

फुले मूवी से संबंधित पोस्ट में ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी कर फंसे अनुराग कश्यप की तकलीफें बढ़ गई हैं। ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में मुंबई पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज करा दी गई है। शिकायत कराने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के एडवोकेट हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक टिप्पणी के आधार पर पुलिस से स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग की है।

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विवादास्पद टिप्पणी मामले में अनुराग कश्यप के खिलाफ शिकायत दर्ज

Mumbai: ब्राह्मण समाज पर किए गए विवादास्पद टिप्पणी के मामले में फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके किए गए पोस्ट के बाद तो विवाद गहरा ही रहा था लेकिन अब ब्राह्मण समुदाय पर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में मुंबई पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज करा दी गई है।

क्या है पूरा मामला

बीते कुछ दिनों से प्रतीक गांधी व पत्रलेखा अभिनीत फिल्म 'फुले' आलोचना के घेरे में है। फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने इस विरोध की निंदा करते हुए भारत में जाति के मुद्दों पर बनी फिल्मों के प्रतिबंध पर सवाल उठाए। साथ ही सेंसर बोर्ड की तरफ से फिल्म के कुछ दृश्यों को एडिट करने की सिफारिश की निंदा भी की। फुले का ट्रेलर लॉन्च होने के बाद से ही ब्राह्मण समुदाय की तरफ से फिल्म पर आपत्ति दर्ज कराई जा रही थी। जिसपर कश्यप ने ब्राह्मणवाद और जातिवाद पर कई पोस्ट लिखे थे, इसी दौरान कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियों के चलते उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है।

कमीश्नर के समक्ष दर्ज कराई गई शिकायत

बॉम्बे हाईकोर्ट के एडवोकेट आशीष राय और पंकज मिश्रा ने अनुराग के खिलाफ मुंबई पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक जिस प्रकार से अनुराग कश्यप ने फिल्म 'फुले' के प्रमोशन के उद्देश्य से किए गए सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म इंस्टाग्राम के पोस्ट में ब्राह्मण समाज के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह निश्चित ही हेट स्पीच के दायरे में आता है।

स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक यह टिप्पणी पब्लिसिटी के उद्देश्य से ब्राह्मण समाज को नीचा दिखाने के लिए की गई थी। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता 2023 के सेक्शन 196, 197, 298, 302, 356 (3), 356(4) एवं IT एक्ट के विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज करवने की मांग की गयी है। शिकायत में खास तौर पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अश्विनी कुमार vs यूनियन ऑफ इंडिया [WP](c) no. 943 of 2021, के तहत दिए गए दिशा निर्देशों को दिखाया गया है। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा बताया गया है कि हेट स्पीच जैसे संवेदनशील कृत्य के खिलाफ राज्य को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। जिससे देश में शांति व्यवस्था बनी रहे।

atul. Singh
अतुल सिंहauthor

मैं अतुल सिंह,मैं 14 वर्षों से अधिक समय से टीवी पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों को खबरों को कवर करने वाला अनुभवी पत्रकार हूं। वर्तमान में Times Now नवभारत के लिए principal correspondent हूं। मैंने इंडिया टीवी, ज़ी न्यूज़,IBN 7 (न्यूज़ 18),Lemon न्यूज़ जैसे प्रमुख मीडिया संगठनों के साथ भी काम किया है। मनोरंजन,नागरिक मुद्दे ,इंफ्रा,राजनीति,आम और विधानसभा चुनाव और अपराध जैसे विषयों को बखूबी कवर किया है। वर्तमान में मुम्बई ब्यूरो से जुड़ा हुआ हूं। कई राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े कई विशेष खबरें भी कवर किया है।

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