Maharashtra Local Body Election: महाराष्ट्र में रिश्वतखोरी से लेकर 'अमिट' स्याही पर उपजे विवाद के बीच गुरुवार को मतदान संपन्न हुए। सोशल मीडिया पर 'अमिट' स्याही को एसीटोन या नेल पॉलिश रिमूवर के जरिए मिटाते हुए दिखाया गया और विपक्ष ने इस मुद्दे को लपकते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को घेरा, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने तो इसे विपक्ष की हार से ही जोड़ दिया। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग की भी सफाई सामने आई। इस बीच, टाइम्स नाउ नवभारत के रिपोटर राकेश त्रिवेदी ने मतदाताओं से बात की जिन्होंने पुष्टि की कि इस बार मार्कर से उंगली में स्याही लगाई गई है।
मार्कर से लगाई 'अमिट' स्याही हटाई
सोशल मीडिया पर उंगली पर लगी 'अमिट' स्याही को हटाने के वीडियो सामने आने के बाद रिपोटर राकेश त्रिवेदी ने इसकी पड़ताल की। उन्होंने जब मतदान देकर आए एक मतदाता की उंगली पर लगी स्याही देखी तो उन्होंने उनसे यह जानना चाहा कि क्या स्याही मिट भी सकती है?
इस पर मतदाता ने कहा, ''मैं अभी वर्सोवा निर्वाचन क्षेत्र में वोट किया है... वहां पर हमें मार्कर लगाया गया था, इससे पहले जब हमने विधानसभा चुनाव में मतदान किया था तब स्याही लगाई गई थी। इस बार एक बदलाव देखने को मिला कि मार्कर से निशान लगाया गया... ऐसे में हम देखेंगे कि यह कैसे निकलता है... सिर्फ विपक्ष ही नहीं लोग भी अपना वीडियो बनाकर डाल (सोशल मीडिया) रहे हैं।''
इस दौरान, रिपोटर राकेश त्रिवेदी द्वारा किए गए एक लाइव डेमो में यह देखा गया कि जब मतदाता की उंगली पर लगे उस मार्कर के निशान पर कॉटन को एसीटोन (Acetone) में भिगाकर इस्तेमाल किया गया, तो वह निशान पूरी तरह से गायब हो गया। इस डेमो को देख ऐसा प्रतीत हुआ जैसे मार्कर की स्याही लगी ही न हो।
यहां देखिए पूरी रिपोर्ट:
स्याही विवाद के बीच मतदान संपन्न
जब लोकतंत्र को गौरवान्वित करने वाली स्याही पर विवाद गर्माया तो सत्तापक्ष और विपक्ष सभी की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ठाकरे ब्रदर्स ने आरोप लगाया कि वोटर की उंगली पर ऐसी स्याही का इस्तेमाल हुआ जिसे केमिकल से तुरंत हटाया जा सकता था और इसकी बदौलत मतदाता दोबारा वोट डाल सकता है। उन्होंने तो सीधे-सीधे राज्य चुनाव आयोग और सत्ताधारी पार्टी में मिलीभगत के आरोप ही लगा दिए।
'मार्कर पेन का हो रहा इस्तेमाल'
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने दावा किया कि बीएमसी चुनावों में वोट डालने के बाद उंगली पर 'अमिट' स्याही की जगह मार्कर पेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया, ''उंगली पर स्याही का निशान आसानी से सैनिटाइजर से मिटाया जा सकता है।'' उन्होंने ने कहा, "अब, एकमात्र विकल्प स्याही लगाना, बाहर जाना, उसे पोंछना और फिर वापस अंदर जाकर फिर से मतदान करना है।"
उद्धव ठाकरे ने भी किए चौंकाने वाले दावे
शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी ऐसे ही दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमिट स्याही, जिसे मतदान के बाद मतदाताओं की उंगलियों पर लगाया जाता है, को नेल पॉलिश रिमूवर और सैनिटाइजर से आसानी से हटाया जा रहा है, जिससे कुछ लोगों को एक से अधिक बार मतदान करने की अनुमति मिल रही है।
निर्वाचन आयोग ने तोड़ी चुप्पी
'स्याही' विवाद को बढ़ता देख राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्टीकरण जारी किया। राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में पारंपरिक स्याही की जगह मार्कर पेन का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, यह 2011 से निरंतर चलता आ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी मतदाता ने मतदान के बाद फिर वोट डालने की कोशिश की तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्याही की गुणवत्ता की होगी जांच
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्य निर्वाचन आयोग ने मार्कर की स्याही की गुणवत्ता की जांच कराने की बात कही है। आयोग ने कहा कि वह बीएमसी चुनावों में मतदान के दौरान मार्कर कलम में इस्तेमाल की गई 'पक्की' स्याही की गुणवत्ता की गहन जांच करेगा।
