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'लॉकअप' में लीजिए टेस्टी फूड का मजा... 140 साल पुराना पुलिस स्टेशन बना अब हैरिटेज कैफे; जानें कहां है ये जगह

मेघालय में लोग जेलों में लजीज खाने का लुत्फ उठा रहे हैं। दरअसल यहां 140 साल पुराना पुलिस थाना अब एक खूबसूरत कैफे में बन गया है। जिसकी जेलों को जाइनिंग रूप में बदल दिया गया है। इस कैफे का उद्घाटन 22 मई को किया गया। इससे आने वाले मुनाफे को पुलिस कल्याण के लिए दान किया जाता है।

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मेघालय के सोहरा में 140 साल पुराने एक पुलिस थाने को खूबसूरत कैफे में बदल दिया गया है। सबसे ज्यादा बारिश वाले इलाकों में शुमार सोहरा में स्थित इस कैफे में अब ग्राहकों को लजीज पकवान परोसे जा रहे हैं। साल 1885 में स्थापित सोहरा पुलिस थाने की इमारत मेघालय की सबसे पुरानी इमारतों में से एक है। ब्रिटिश शासन के दौरान इस इमारत का इस्तेमाल एक कुख्यात हिरासत केंद्र के रूप में किया जाता था। हालांकि, अब इस थाने को ‘सोहरा 1885’ नाम के कैफे में तब्दील कर दिया गया है, जो खाने के शौकीन लोगों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है। इस कैफे में इतिहास और आतिथ्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। ग्राहक ‘कैफे 1885’ में ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील की गई जेलों में अपने पसंदीदा पकवानों का लुत्फ उठा सकते हैं। कैफे से अर्जित मुनाफा पुलिस कल्याण के लिए दान कर दिया जाता है।

किसने दिया पुलिस थाने को कैफे में बदलने का आईडिया

सोहरा पुलिस थाने को कैफे में बदलने का विचार ईस्ट खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विवेक सईम ने दिया था, जो उस समय क्षेत्र (सोहरा) में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के रूप में तैनात थे। मेघालय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके इस विचार का पूर्ण समर्थन किया। सईम ने कहा, “मैं इतिहास में खास स्थान रखने वाले इस पुलिस थाने के साथ हमेशा से कुछ अलग करना चाहता था। राज्य में ऐसी बहुत कम इमारतें बची हैं, जो इतिहास में खास स्थान रखती हैं।” उन्होंने कहा, “मैंने सोहरा पुलिस थाने को कैफे में बदलने का विचार तब दिया था, जब मैं इलाके में डीएसपी था। मुझे पता था कि इतिहास में खास स्थान रखने के कारण यह भवन बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करेगा।”

मेघालय सरकार ने दो साल पहले जब सोहरा में अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात करने के लिए नये थाना भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी, तब पुरानी इमारत से आर्थिक लाभ हासिल करने के इरादे से इसे कैफे में बदलने की कवायद तेज हो गई। सईम ने कहा, “थाने को कैफे में बदलने का मतलब था पुलिस बल के लिए अतिरिक्त आय, जिसका इस्तेमाल पुलिस कल्याण के लिए किया जा सकता था।” उन्होंने बताया कि कैफे के संचालन के लिए साझेदार चुनने के वास्ते निविदा प्रक्रिया दो साल पहले शुरू की गई।

जेल बनी डाइनिंग रूम

सईम के मुताबिक, युवा उद्यमी नफी नोनग्रम को कैफे के संचालन के लिए चुना गया, जिन्होंने इमारत की संरचना के हिसाब से इसका डिजाइन प्रस्तुत किया और इसे ‘सोहरा 1885’ नाम दिया। उन्होंने बताया कि नफी ने ब्रिटिश काल की वस्तुओं का इस्तेमाल कर पुलिस थाने को खूबसूरत कैफे का रूप दिया। नफी ने कहा, “हमने जेलों को ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील किया। आगंतुकों को कैफे का लुक और माहौल काफी अच्छा लगता है।” सईम ने बताया कि नफी ने इमारत की दीवारों और फर्श में कोई बदलाव नहीं किया, क्योंकि ये आज भी काफी अच्छी स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि थाने में मौजूद अंगीठी की भी मरम्मत कर उसे उसके पुराने स्वरूप में ढाला गया।

22 मई को किया गया उद्घाटन

नफी के अनुसार, कैफे में एक साथ 200 लोग अपने पसंदीदा पकवानों का लुत्फ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इसमें 200 किलोग्राम की एक तिजोरी का भी रंगरोगन किया गया है, जो पर्यटकों के बीच आकर्षण के केंद्र के रूप में उभर रही है। ‘सोहरा 1885’ का उद्घाटन 22 मई को किया गया। तब से बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग इसका रुख कर रहे हैं। बत्स्केम थबाह नाम की एक ग्राहक ने कहा, “यह कैफे वाकई बहुत खूबसूरत है। हमें ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील की गई जेल में खाना खाकर काफी मजा आया।”

(इनपुट - भाषा)

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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