Bimol Akoijam: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित की ओर से 9 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की बात कही गई है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि बिमोल अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं और JNU में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। विश्वविद्यालय के आदेश के मुताबिक, मामले की जांच आंतरिक समिति (Internal Committee) ने की थी। समिति के निष्कर्षों के आधार पर प्रोफेसर के खिलाफ बड़ी सजा की सिफारिश की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने संबंधित सेवा नियमों के तहत बर्खास्तगी का फैसला लिया। JNU का 9 अक्टूबर 2026 का आदेश, जो आपके साझा किए गए दस्तावेज में उपलब्ध है।
मई में सामने आई थीं शिकायतें
इस मामले में मई 2026 में छात्राओं की ओर से शिकायतें किए जाने की बात सामने आई थी। करीब 11 विद्यार्थियों ने प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायतों में मौखिक परीक्षा (वाइवा) के दौरान कथित तौर पर अनुचित और अश्लील टिप्पणियां करने, यौन संबंधों के बदले अधिक अंक देने की पेशकश करने और कैंपस स्थित आवास पर आयोजित पार्टियों में अनुचित व्यवहार करने जैसे आरोप शामिल थे। ये शिकायतकर्ताओं के आरोप थे, जिन्हें जांच के जरिए परखा जाना था। बताया गया कि मई में शिकायतें सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने मामले की जांच शुरू की। जुलाई में सेमेस्टर दोबारा शुरू होने के बाद भी यह मामला कैंपस में चर्चा का विषय बना रहा।
सितंबर में बढ़ा था मामले पर दबाव
मामले में कार्रवाई को लेकर सितंबर में JNU प्रशासन पर सवाल उठने लगे थे। 8 और 9 सितंबर के आसपास अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कैंपस में प्रदर्शन कर मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की। इसके बाद 14 सितंबर को दिल्ली महिला आयोग ने मामले का संज्ञान लिया। आयोग ने JNU की कुलपति को नोटिस भेजकर तीन दिन के अंदर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी। आयोग ने शिकायतों की स्थिति, आंतरिक समिति की जांच और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी। 18 सितंबर को कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने कहा था कि विश्वविद्यालय नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के मुताबिक काम करेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि जांच प्रक्रिया में राजनीतिक दबाव के आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
9 अक्टूबर को बर्खास्तगी का आदेश
अब 9 अक्टूबर को जारी आदेश के साथ मामले में विश्वविद्यालय की ओर से बड़ी कार्रवाई सामने आई है। आदेश में कहा गया है कि आंतरिक समिति की जांच और रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर को सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया गया है। विश्वविद्यालय ने इसके लिए संबंधित सेवा नियमों और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों का हवाला दिया है। आदेश के अनुसार, बर्खास्तगी तत्काल प्रभाव से लागू होगी। प्रोफेसर बिमोल अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद हैं। संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर उनका JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स में प्रोफेसर रहे हैं।
