Juvenile Justice Act 2015: सुप्रीम कोर्ट में 10 और 11 अक्टूबर को जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2015 के दस साल पूरे होने पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत 10 अक्टूबर को इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी और UNICEF इंडिया संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। इस सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, बाल अधिकार विशेषज्ञ और बच्चों के संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन का मकसद पिछले दस साल में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के क्रियान्वयन की समीक्षा करना, इसकी चुनौतियों की पहचान करना और अगले दस साल के लिए प्राथमिकताएं तय करना है।
सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसलों का संकलन जारी करेंगे CJI
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में सुप्रीम कोर्ट की जज और जुवेनाइल जस्टिस कमेटी की अध्यक्ष जस्टिस बीवी नागरत्ना शुरुआती संबोधन देंगी। इसके बाद UNICEF इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सिंथिया मैककैफ्री अपनी बात रखेंगी। कार्यक्रम के दौरान CJI सूर्यकांत जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 से जुड़े सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के अहम फैसलों का एक संकलन भी जारी करेंगे। इसमें साल 2015 से सितंबर 2026 तक के महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों को शामिल किया गया है।
बच्चों के अधिकार और पुनर्वास पर होगा फोकस
दो दिवसीय सम्मेलन में कानून के क्रियान्वयन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें कानून से संघर्ष करने वाले बच्चों के अधिकार, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की ओर से जघन्य अपराधों के मामलों में शुरुआती आकलन, कमजोर परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की देखभाल और सुरक्षा, गोद लेने की प्रक्रिया और संस्थागत देखभाल जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के पुनर्वास और समाज में दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में इस बात पर विचार होगा कि बच्चों के अनुकूल न्याय व्यवस्था को कैसे मजबूत किया जाए और अलग-अलग संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए।
11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि साझा करेंगे अनुभव
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट लागू करने के अनुभवों पर चर्चा होगी। तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दिल्ली, गुजरात, ओडिशा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। इन सत्रों में कानून को लागू करने में आ रही चुनौतियों, बेहतर कामकाज के तरीकों और बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जाएगा।
11 अक्टूबर को होगा समापन सत्र
दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 11 अक्टूबर को होगा। समापन सत्र में UNICEF इंडिया की चाइल्ड प्रोटेक्शन प्रमुख मिलेन किडाने विशेष टिप्पणी करेंगी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक विशेष संबोधन देंगे। सुप्रीम कोर्ट के जज और जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के सदस्य जस्टिस जेबी पारदीवाला समापन टिप्पणी करेंगे। इस सम्मेलन से भारत में किशोर न्याय व्यवस्था की अगली दशक की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका मुख्य जोर बच्चों के अधिकारों की रक्षा, संस्थागत जवाबदेही मजबूत करने और हर बच्चे को देखभाल, सुरक्षा, गरिमा और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने पर रहेगा।
