Meerut: मेरठ के साकेत इलाके में रहने वाले रिटायर्ड जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने समाज को एक संदेश दिया है कि बेटी पर बोझ नहीं, बल्कि अभिमान होती है। उनकी इकलौती बेटी प्रणिता शर्मा की शादी साल 2018 में शाहजहांपुर के रहने वाले सेना के मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही प्रणिता को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। सात साल तक चले इस विवाद और संघर्ष के बाद आखिरकार शनिवार, 4 अप्रैल को मेरठ की फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को मंजूरी दे दी।
कोर्ट से घर तक निकला जुलूस
तलाक की डिक्री मिलते ही जज साहब के परिवार ने इसे बेटी की 'आजादी' के रूप में मनाया। कोर्ट परिसर से घर तक प्रणिता को ढोल-नगाड़ों के साथ लाया गया। रास्ते भर परिवार के सदस्य झूमते और नाचते नजर आए। घर पहुंचने पर प्रणिता का भव्य स्वागत फूल-मालाओं से किया गया और पूरे मोहल्ले में मिठाइयां बांटी गईं। इस दौरान सबसे खास बात यह थी कि परिवार के सभी सदस्यों ने काले रंग की टी-शर्ट पहनी थी, जिस पर प्रणिता की तस्वीर के साथ “I Love My Daughter” लिखा हुआ था।
न दहेज लिया, न गुजारा भत्ता
डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी ससुराल में खुश नहीं थी और घुट-घुट कर जी रही थी। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने दामाद या उनके परिवार से न तो कोई सामान वापस लिया और न ही किसी प्रकार का गुजारा भत्ता मांगा। उन्होंने कहा, "मुझे अपनी बेटी की खुशियां और उसका आत्मसम्मान चाहिए था, जो मुझे मिल गया है। अब वह हमारे साथ रहकर अपने बेटे की परवरिश करेगी और एक नई शुरुआत करेगी।"
सोशल मीडिया पर मिली सराहना
इस घटना के वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल रहे हैं। लोग रिटायर्ड जज के इस कदम की सराहना कर रहे हैं और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहे हैं।
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