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किसान भाई सावधान : 26 से 29 मार्च तक आंधी-बारिश, ओलावृष्टि-वज्रपात, मेहनत-पैसे पर फिरेगा पानी; गेहूं, चना, सरसों होगा बर्बाद!

मौसम 26 -29 मार्च 2026 (Weather Storm Rain Alert) मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि समूचे उत्तर भारत में 26 मार्च से एक नया मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसके प्रभाव से दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे खेतों पर खड़ी रबी की फसल (गेहूं, चना और सरसों) या कटकर खेतों पर पड़ी फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। हवा और बारिश के कारण पकी फसल के दाने झड़ सकते हैं और फसल गिर सकती है। इससे किसानों की मेहनत और खर्च दोनों बर्बाद हो सकते हैं। आइये जानते किन राज्यों पर बारिश का अधिक असर दिखाई देगा।

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रबी की फसल पर बारिश

मौसम 26 -29 मार्च 2026 (Weather Storm Rain Alert) : देश के अधिकांश राज्यों में मौसम उतार-चढ़ाव के साथ गुजर रहा है। मार्च के शुरुआती दिनों में अचानक बढ़े तापमान पर बादलों ने ब्रेक लगा दिया और ज्यादातर राज्यों में आंधी-बारिश की गतिविधियां रिकॉर्ड की गईं, जिससे मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। करीब 10 से 12 दिन होने को हैं और बादलों की आवाजाही जारी है और आंधी-बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 26 से मार्च तक उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों पर मौसम करवट लेने वाला है। 26 मार्च गुरुवार से एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से मेघ गर्जन, आंधी और पानी गिरने के साथ ओले गिरने का खतरा बढ़ गया है। अगर, एक बार फिर से मौसमी गतिवधियां होती हैं तो खेतों पर पक कर खड़ी रबी की फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है, जिससे किसान भाईयों की लागत और मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

किन राज्यों में होगी बारिश

मौसम विभाग ने अगले 3 दिन बाद के मौसम का पूर्वानुमान जताते हुए बताया है कि समूचे उत्तर भारत में लगातार तीन वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव होने जा रहे हैं, जिनके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों पर 26 मार्च से लेकर 29 मार्च तक तेज 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और तड़ित झंझा यानी बादलों की गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है। बेमौसम बारिश से खेतों पर पकी और कटने के लिए खड़ी रबी की फसल गेहूं इत्यादि को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

कृषि विभाग ने बताया कि मौजूदा समय में उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर गेहूं की खेती कटान के लिए खड़ी है। खासकर, हरियणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसान गेहूं के साथ, सरसों और चना जैसी रबी की फसने बोते हैं, जिनकी कटाई अंतिम चरण की ओर है। अगर, ऐसे पीक समय में बेमौसम बारिश और आंधी के साथ ओले गिरते हैं तो गेहूं की फसल जमीन पर लेट सकती और पानी भरने से सड़ान पैदा हो सकती है, जिसे कृषि भाषा में लॉजिंग कहते हैं। लॉजिंग होने से फसल की कटाई बेहद मुश्किल-जटिल हो जाती है और पैदावर घटती है और अनाज की क्वालिटी भी खराब हो जाती है।

बारिश से खराब फसल में फंगल संक्रमण (फंफूदी) पकड़ने का खतरा बढ़ जाता है, जो दानों के भरने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। वहीं, सरसों की फसल में बीज झड़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे फसल से सड़न की बदबू और तेज की मात्रा में कमी आती है। वहीं, चने की फसल और दालों में नमी के कारण दाने सिकुड़ने लगते या फफूंद लगने की आशंका बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर न सिर्फ पैदावार पर ही नहीं बल्कि बाजार में मिलने वाले दाम पर भी पड़ता है, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है।

किसान भाईयों के लिए एक्सपर्ट ने कुछ बुनियादी सलाह दी है। इन उपायों से किसान अपनी फसल को बचा सकते हैं।

  • किसान कटाई के बाद फसल को अच्छी तरीके से बांध लें और मौसम खराब होने पर तिरपाल इत्यादि से ढक दें।
  • फसल भीग जाए तो मौसम खुलते ही तुरंत काटकर खुले में या छाया में फैला दें और फसल को समय-समय पर पलटते रहें, ताकि वो अच्छे तरीके से सूख जाए।
  • अगर फसल में ज्यादा नमी है को कृत्रिम हीटर या ड्रायर का इस्तेमाल करके सुखाया जा सकता है।
आईएमडी का संकेत है कि मार्च के महीने में लगभग पूरे देश में मौसमी गतिविधियां होंगी। सिर्फ उत्तर भारत नहीं बल्कि पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल, सिक्किम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में आंधी-तूफान और बारिश से मौसम बिगड़ेगा। उधर, दक्षिण भारत में साइक्लोनिक सर्कलेशन के प्रभाव से तटीय भागों पर अच्छी-खासी बारिश का अलर्ट घोषित किया गया है। इसका आंशिक असर पश्चिमी घाटों के राज्यों पर भी पड़ सकता है।
Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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