मध्य प्रदेश में नकली और सिंथेटिक पनीर (एनालॉग पनीर) के खिलाफ राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि राज्य में एनालॉग पनीर को हतोत्साहित किया जाएगा और इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश को प्राकृतिक रूप से उत्पादित शुद्ध दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता के लिए पहचान दिलाना है।
पड़ोसी राज्यों के प्रतिबंध का असर
राज्य के मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों द्वारा एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने के बाद, मध्य प्रदेश में इसके डंपिंग (खपत या खपाए जाने) की आशंका काफी बढ़ गई थी। FSSAI के दिशा-निर्देशों के बावजूद कई जगह इनका सही पालन नहीं होता है, जिससे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल कर नकली पनीर तैयार किया जाता है।
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'शुद्ध के लिए युद्ध' अभियान
सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो लोग भी एनालॉग पनीर के निर्माण या बिक्री में शामिल हैं, वे इस कारोबार को तुरंत बंद कर दें। आदेश जारी होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और ऐसे उत्पादों को जब्त कर नष्ट कर दिया जाएगा।
आगामी त्योहारों जैसे रक्षाबंधन को ध्यान में रखते हुए, राज्य के खाद्य विभाग द्वारा 'शुद्ध के लिए युद्ध' अभियान के तहत मिलावटी मावा और अन्य खाद्य पदार्थों की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि आम जनता को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री मिल सके।
