धार स्थित भोजशाला में पूजा के बाद मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Mohan Yadav) ने बड़ा ऐलान किया है। मोहन यादव ने कहा है कि धार में मां सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थानों की स्थापना की जाएगी। सीएम ने कहा कि राजा भोजपाल द्वारा स्थापित भोजशाला सदियों तक ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान और संस्कृत भाषा का सबसे प्रखर केन्द्र रहा है। राज्य सरकार भोजशाला के उसी गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने के लिए सभी जरूरी प्रयास करेगी।
धार में विकास की नई धारा- मोहन यादव
आगे मोहन यादव ने कहा कि भोजशाला हमारी प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा का अटूट प्रतीक है। भोजशाला में दूर-दूर से छात्र और विद्वान ज्ञान अर्जित करने और शास्त्रों पर विमर्श करने आते थे। राजा भोज की इस पुण्य धरा (धार) में अब चहुंमुखी विकास की नई धारा बहेगी। धार के आसपास पुरात्व विभाग से समन्वय कर सभी प्रकार के विकास कार्य किए जायेंगे।
आर्थिक सहायता देने का ऐलान
मोहन यादव ने इस दौरान एक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भोजशाला के लिए हुए आंदोलन में शहादत देने वाले तीन शहीदों स्व. बनसिंह, स्व. अंतरसिंह एवं स्व. लक्म्ंण सिंह के निकटतम परिजन को राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
कल भोजशाला में सीएम ने की थी पूजा
दरअसल 25 मई को सीएम मोहन यादव धार स्थित भोजशाल पहुंचे थे, जहां उन्होंने मां वाग्देवी का पूरे विधि-विधान से पूजन किया था। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज गंगा दशमी का पावन दिन है। धार राजा भोज की नगरी है। राजा भोज- सम्राट विक्रमादित्य और हर्षवर्धन, तीनों मालवा के ऐसे लाल हैं, जिनकी वजह से सनातन संस्कृति ने दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाई है। राजा भोज ने खुद कई किताबें लिखीं और पुरातन महत्व की इमारत बनवाईं। दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग अगर किसी ने बनवाया, तो राजा भोज ने बनवाया। राजा भोज ने नदी की मुख्य धारा को बंद करने के बजाए, भोपाल तालाब बनाया। उनकी तकनीक पर अच्छे से अच्छे विद्वान दांतों तले अंगुलि दबाते हैं। उन्होंने कहा कि राजा भोज ने कवि सम्मेलन कराया और कवियों को एक-एक सोने की ईंट का अवॉर्ड दिया। यह है हमारा गौरवशाली अतीत।
