लखनऊ

UP: ODOP की तर्ज पर हर जिले का होगा अपना खेल, मोदी की काशी और योगी का गोरखपुर कुश्ती पर लगाएगा 'स्वर्णिम दांव'

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Nov 30, 2022, 03:49 PM IST

One District one sports: एक जिला एक उत्पाद योजना की तर्ज पर अब यूपी में एक जिला एक खेल योजना लागू की गई है। प्रदेश की खेल की प्रतिभाओं को निखारने के लिए सरकार ने वन डिस्ट्रिक, वन स्पोर्ट्स (ओडीओएस) योजना भी शुरू की है।

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UP: ODOP की तर्ज पर हर जिले का होगा अपना खेल, मोदी की काशी और योगी का गोरखपुर कुश्ती पर लगाएगा 'स्वर्णिम दांव'

One District one sports scheme: 24 जनवरी 2018 को उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस पर योगी सरकार ने ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) योजना लांच की थी। इसका मकसद उत्तर प्रदेश की बेहद संपन्न पारंपरिक कला, कौशल एवं सांस्कृतिक विरासत को नयी पहचान दिलाने के साथ इससे जुड़े लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करना था। योजना को सफल बनाने के लिए सरकार ने इनसे जुड़े लोगों के प्रशिक्षण, वित्तपोषण, तकनीकी सहयोग, मांग के अनुरूप उत्पाद की डिजाइनिंग व पैकेजिंग आदि पर ध्यान दिया।

नतीजतन ओडीओपी आज योगी सरकार की सफलतम योजनाओं में से है। हाल में ही इंडोनेशिया की राजदूत इना एच. कृष्णमूर्ति ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ओडीओपी को अपने यहां भी लागू करने के बारे में बताया था। ठीक इसी तरह प्रदेश की खेल की प्रतिभाओं को निखारने के लिए सरकार ने वन डिस्ट्रिक, वन स्पोर्ट्स (ओडीओएस) योजना भी शुरू की है। इसके तहत संबंधित जिले में कौन सा खेल लोकप्रिय है। उस खेल में जिला, प्रदेश, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वहां के खिलाड़ियों का प्रदर्शन कैसा रहा है, इसे मानक बनाया गया है।

मोदी की काशी एवं योगी का गोरखपुर कुश्ती पर लगाएगा 'स्वर्णिम दांव'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काशी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर समेत पूर्वांचल के देवरिया, महाराजगंज, आजमगढ़ और चंदौली का कुश्ती में स्वर्णिम इतिहास रहा है। सरकार ने यहां का ओडीओएस कुश्ती को ही बनाया है। यहां के अनेक पहलवानों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा फहराया है। क्रिकेट के इस दौर में भी यहां के कई अखाड़े अब भी पहलवानों की नर्सरी बने हुए हैं। नागपंचमी पहलवानों की जोर आजमाइश का बड़ा दिन होता है। योगी आदित्यनाथ के संरक्षण में दशकों से इस दिन गोरखनाथ मंदिर में कुश्ती का वृहद आयोजन होता है। हरियाणा, जिसने देश को सर्वाधिक पदक विजेता पहलवान दिये हैं। उससे सटे बागपत का भी एक जिला एक स्पोर्ट्स कुश्ती ही है।

खेलों का सिरमौर बनेगा यूपी का हर जिला

केंद्र सरकार की सहमति से ओडीओएस योजना में शामिल करने के लिए 10 जिलों के खेल बदले भी गए हैं। इन सभी जिलों के खेलो इंडिया सेंटर में खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने का काम कुशल प्रशिक्षकों की देखरेख में जारी है। रही सही कसर शीघ्र आने वाली प्रदेश की नई खेल नीति से हो पूरी जाएगी।

बदले गए 10 जिलों के खेल जिन 10 जिलों के खेल बदले गए हैं, उनमें मथुरा में जूडो की जगह कुश्ती, बलिया, आंबेडकर नगर, कानपुर देहात एवं फतेहपुर में बैडमिंटन की जगह एथलेटिक्स, बहराइच में बैडमिंटन की जगह फुटबाल, श्रावस्ती में बैडमिंटन की जगह कबड्डी, झांसी, गोंडा एवं लखीमपुर खीरी में बैडमिंटन की जगह हॉकी को एक जिला एक खेल घोषित कर खेल प्रतिभाओं का चयन व प्रशिक्षण का काम जारी है।

ओडीओएस योजना (खेल व जिले)

  • कुश्ती- वाराणसी, गोरखपुर, चंदौली, बागपत, आजगमढ़, देवरिया, महराजगंज
  • एथलेटिक्स – मैनपुरी, फिरोजाबाद, जौनपुर, भदोही, संभल, सीतापुर, कासगंज, उन्नाव, अयोध्या, कौशाम्बी, एटा, अमेठी, रामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, चित्रकूट, बस्ती, हमीरपुर, हापुड़, मेरठ, गाजीपुर, शामली, बलिया और मुजफ्फरनगर
  • हॉकी – प्रतापगढ़, मऊ, बरेली,लखनऊ, रायबरेली, हरदोई, फर्रुखाबाद, मुरादाबाद, बलरामपुर, इटावा और गाजियाबाद
  • टेबिल टेनिस – आगरा, कानपुर
  • बैडमिंटन – अलीगढ़ और गौतमबुद्ध नगर
  • भारोत्तोलन – मिर्जापुर और बिजनौर
  • बॉक्सिंग – बुलंदशहर और कुशीनगर
  • तीरंदाजी – सोनभद्र और ललितपुर
  • फुटबाल – हाथरस
  • तैराकी – पीलीभीत
  • शूटिंग – बांदा
  • कबड्डी – कन्नौज
  • लॉन टेनिस – प्रयागराज
क्या बोले अधिकारी

नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव (खेल) का कहना है कि खेल प्रतिभाओं को निखारने के एक यूनिवर्सल नियम है, "कैच डेम यंग"। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि अलग-अलग क्षेत्र में लोकप्रिय खेल से जुड़ी प्रतिभाओं की सही उम्र में पहचान कर उनका प्रदर्शन बढ़ाने के लिए क्रमशः उन्हें जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाय। ओडीओएस योजना का मकसद भी यही है। हमारा प्रयास होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप आने वाले कुछ वर्षों में आबादी के अनुरूप उत्तर प्रदेश खेलों में भी सिरमौर बने।

कुलदीप राघव
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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