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No Insurance, No Fuel! बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

अगर आपकी कार, बाइक या दूसरी गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो गया है, तो यह खबर आपके काम की है। आने वाले समय में बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल मिलने में परेशानी हो सकती है।

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बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

अगर आप रोज अपनी कार, बाइक या दूसरी गाड़ी से सफर करते हैं और पेट्रोल-डीजल भरवाते हैं, तो मोटर इंश्योरेंस से जुड़ा यह अपडेट आपके लिए जरूरी है। बिना वैध थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस के सड़क पर गाड़ी चलाना पहले से ही नियमों के खिलाफ है। अब आने वाले समय में बिना बीमा वाली गाड़ियों के लिए पेट्रोल और डीजल लेना भी मुश्किल हो सकता है। दरअसल, इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI एक ऐसे सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसमें पेट्रोल पंप पर ईंधन भरने से पहले गाड़ी के इंश्योरेंस की स्थिति जांची जा सकेगी।

इस प्रस्तावित सिस्टम में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन यानी ANPR तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके तहत पेट्रोल पंप पर लगे कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे। इसके बाद नंबर प्लेट से मिले वाहन नंबर को बीमा रिकॉर्ड और सरकारी वाहन रिकॉर्ड से मिलाया जा सकेगा। इस तरह यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि गाड़ी के पास वैध थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस है या नहीं। इसके लिए बीमा सूचना ब्यूरो यानी IIB और VAHAN जैसे रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे काम कर सकता है No Insurance-No Fuel सिस्टम?

अगर यह सिस्टम लागू होता है तो पेट्रोल पंप पर पहुंचने वाली गाड़ियों की नंबर प्लेट कैमरे से स्कैन की जा सकती है। सिस्टम वाहन नंबर की मदद से बीमा की वैधता जांचेगा। अगर बीमा चालू है, तो सामान्य तरीके से ईंधन दिया जा सकता है। वहीं, अगर वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं मिलता है, तो आगे क्या कार्रवाई होगी, यह सरकार और संबंधित एजेंसियों के नियमों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुनिंदा जगहों पर आजमाने की तैयारी की जा रही है।

अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है और सरकार इस व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू करती है, तो भविष्य में पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से पहले वाहन का बीमा स्टेटस जांचने की व्यवस्था हो सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य बिना बीमा चलने वाली गाड़ियों की पहचान करना और वाहन मालिकों को अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि पायलट प्रोजेक्ट और पूरे देश में लागू नियम एक ही बात नहीं हैं। अंतिम व्यवस्था सरकार के फैसले और जारी होने वाले नियमों पर निर्भर करेगी।

क्या कहते हैं आंकड़े?

यह पहल सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त के फैसले के बाद चर्चा में आई है। कोर्ट ने IRDAI को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय यानी MoRTH के साथ मिलकर ऐसी पायलट परियोजना तैयार करने को कहा था, जिसमें वाहन के वैध बीमा और ईंधन की बिक्री के बीच संबंध की संभावना को जांचा जा सके। इसका मकसद बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान करने और मोटर इंश्योरेंस की कवरेज बढ़ाने की दिशा में काम करना है।

सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गए आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 30.48 करोड़ रजिस्टर्ड वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहनों के पास वैध बीमा नहीं था। यानी बड़ी संख्या में वाहन बिना जरूरी इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं। ऐसे में अगर No Insurance-No Fuel व्यवस्था भविष्य में लागू होती है, तो वाहन मालिकों के लिए समय पर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कराना और पॉलिसी की वैधता जांचते रहना और भी जरूरी हो जाएगा। फिलहाल वाहन मालिकों को अपने इंश्योरेंस की वैधता जरूर चेक करनी चाहिए, लेकिन प्रस्तावित सिस्टम को लेकर अंतिम नियम आने तक इसे लागू नियम मानना सही नहीं होगा।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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