प्याज की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। देश के कई हिस्सों में बाजार में प्याज 60 से 70 रुपये किलो तक बिक रहा है। खास बात यह है कि महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रही है। इसके बावजूद खुदरा बाजार में ग्राहकों को महंगा प्याज खरीदना पड़ रहा है।
सरकार ने प्याज की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए 24 अगस्त से बफर स्टॉक से प्याज निकालकर बिक्री शुरू की थी। इसके लिए NCCF, NAFED, केंद्रीय भंडार और मोबाइल वैन की मदद ली जा रही है। उत्पादक राज्यों से बड़े शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए 'कांदा एक्सप्रेस' का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मकसद बाजार में प्याज की सप्लाई बढ़ाना और बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देना है।
सस्ता क्यों नहीं हो रहा प्याज?
इसके बावजूद बाजार में प्याज का भाव नीचे नहीं आ पाया है। इसकी एक बड़ी वजह प्याज की सप्लाई का अंतर बताया जा रहा है। दरअसल, इस समय रबी और खरीफ फसल के बीच का दौर चल रहा है। पुराने रबी प्याज का स्टॉक धीरे-धीरे कम हो जाता है, जबकि नई खरीफ फसल की पर्याप्त मात्रा में बाजार में आवक नहीं हो पाती। ऐसे में कुछ समय के लिए बाजार में सप्लाई कम पड़ती है और कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
प्याज महंगा होने का मतलब यह नहीं है कि देश में प्याज की कुल कमी है। सरकार के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन रहा, जबकि पिछले साल यह करीब 307.67 लाख टन था। यानी कुल उत्पादन में बहुत बड़ा अंतर नहीं है। फिलहाल परेशानी मुख्य रूप से फसल की उपलब्धता और बाजार तक उसकी सप्लाई के समय को लेकर बताई जा रही है।
सरकार की क्या है तैयारी?
सरकार ने 2026-27 के लिए बफर स्टॉक के लिए 2 लाख टन रबी प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसमें से करीब 1.21 लाख टन प्याज खरीदा जा चुका है। किसानों को बफर स्टॉक के लिए प्याज बेचने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से खरीद मूल्य भी 18.75 रुपये से बढ़ाकर 21.25 रुपये प्रति किलो किया गया है।
हालांकि, मंडियों और खुदरा बाजार तक प्याज पहुंचने में समय लगने के कारण सरकार के सस्ते प्याज का फायदा हर जगह एक जैसा नहीं मिल पा रहा है। सरकार की ओर से बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये किलो बेचने की व्यवस्था है, लेकिन कई जगह ग्राहक अभी भी 60 से 70 रुपये किलो तक भुगतान कर रहे हैं।
आने वाले समय में प्याज की कीमतों पर नई खरीफ फसल की आवक का असर देखने को मिल सकता है। जैसे-जैसे बाजार में नई फसल की सप्लाई बढ़ेगी, कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद बन सकती है। हालांकि, स्थानीय बाजार में प्याज का भाव अलग-अलग हो सकता है और गुणवत्ता, सप्लाई तथा मांग के हिसाब से इसमें अंतर रह सकता है।
फिलहाल प्याज की बढ़ी कीमतों से घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है। सरकार बफर स्टॉक के जरिए सस्ता प्याज उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है, लेकिन खुदरा बाजार में इसका फायदा पूरी तरह पहुंचने में सप्लाई और वितरण बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
