हमारा देश लंबे समय तक गुलाम रहा है। अंग्रेजों ने भारत को लूटकर अपना खजाना खूब भरा। इसके साथ ही अंग्रेजों ने भारत को कई चीजें भी दीं, जो आ भी मौजूद हैं। ऐसा ही एक चीज है क्लॉक टावर यानी घंटाघर। अंग्रेजों के समय पर ही देश के अलग-अलग हिस्सों में घंटाघर बनवाए गए। लेकिन आज कहानी देश के सबसे ऊंचे घंटाघर की, जिसे एक अंग्रेज लेफ्टिनेंट गवर्नर के स्वागत के लिए नवाब ने बनवाया था। चलिए जानते हैं इसकी पूरी कहानी -
कहां है यह घंटाघर
अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि हम लखनऊ में मौजूद हुसैनाबाद क्लॉक टावर (Hussainabad Clock Tower) यानी घंटाघर की बात कर रहे हैं। इस क्लॉक टावर को साल 1881 में मशहूर रूम दरवाजा के पास बनवाया गया था। यह लखनऊ में गोमती नगर के पास है और यहां पास में ही गुलाब वाटिका भी है। किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज भी यहां से काफी नजदीक है।किसने और क्यों बनवाया घंटाघर
लखनऊ के इस घंटाघर को नवाब नासिर-उद्दीन हैदर (यह टावर अंग्रेजी वास्तुकला का बहुत ही शानदार उदाहरण है। इसमें विक्टोरियन और गॉथिक स्थापत्य कला का इस्तेमाल किया गया है। आज के लखनऊ के बीच में मौजूद यह टावर अपने इतिहास और ऐतिहासिक वास्तुकला को समेटे हुए है। जब कभी भी लखनऊ आना हो तो यहां जरूर जाएं।
घंटाघर की ऊंचाई
उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों का शहर कहे जाने वाले लखनऊ की पहचान माने जाने वाले इस घंटाघर की ऊंचाई 67 मीटर यानी 221 फीट है। इस तरह से यह देश का सबसे ऊंचा घंटाघर है। लखनऊ के इस टूरिस्ट अट्रैक्शन यानी घंटाघर के घंटे को बनाने में दुर्लभ सामग्री गनमेटल (Gunmetal) का इस्तेमाल किया गया है।ऐसी है घंटाघर की घड़ी
गौथिक-विक्टोरियन स्टाइल के इस क्लॉक टावर की घड़ी के पुर्जे गनमेटल से बने हैं। इसमें एक 14 फीट का लंबा पेंडुलम है। इसके अलावा इसकी घड़ी भी 12 पंखुड़ियों वाले फूल के आकार की बनी है। 1881 में जब इस क्लॉक टावर को बनाया गया था तो उस समय इसको बनाने में 1.75 लाख रुपये की लागत आयी थी।
घंटाघर
