उत्तर प्रदेश में कई ऐतिहासिक मंदिर हैं। इन मंदिरों से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। ऐसे ही कुछ मंदिर लखीमपुर खीरी में भी हैं। लखीमपुर खीरी को पहले लक्ष्मीपुर जिले के नाम से जाना जाता था। यह जगह पहले खर के वृक्षों से घिरा हुआ था। जिस कारण इसका नाम खीरी पड़ा। यहां गोकरनाथ, देवकाली, लिलौटीनाथ और फ्राग मंदिर जैसे कई प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं। आइए जानते हैं लखीमपुर के इन ऐतिहासिक मंदिरों का इतिहास।
गोकरन नाथ
गोल गोकरन नाथ को छोटी काशी भी कहा जाता है। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग पर रावण के अगूठे का निशान आज भी मौजूद है। हर साल यहां चैत्र माह में चेती मेले का आयोजन किया जाता है।
लिलौटी नाथ मंदिर
शारदा नगर मार्ग पर स्थित लिलौटी नाथ मंदिर है। माना जाता है कि इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की स्थापना महाभारत काल के दौरान द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वशथामा ने की थी। माना जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग रोज कई बार रंग बदलता है। हर साल जुलाई माह में यहां मेले का आयोजन किया जाता है।
मेंढक मंदिर
लखीमपुर में एक फ्रॉग मंदिर भी है, ये भी महादेव को ही समर्पित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मेढ़क के आकार में बना हुआ है। मंदिर के ऊपर लगा हुआ छत्र सोने से निर्मित है, जिसमें नटराज जी की नृत्य करती मूर्ति चक्र के अन्दर मंदिर में विराजमान है, जो सूर्य की दिशा के अनुसार घूमता है।
देवकाली शिव मंदिर
देवकाली शिव मंदिर एक ऐतिहासिक मंदिर है। भगवत गीता के अनुसार राजा परीक्षित ने अपने बेटे के जन्म पर यहां नाग यज्ञ का आयोजन किया था। सभी सांप यज्ञ मंत्र की शक्ति से उस हवन कुंड में कूद पड़े। मंदिर का नाम भगवान ब्रह्मा की पुत्री देवकाली के नाम पर पड़ा है।
टेडे़नाथ मंदिर
टेडे़नाथ मंदिर भी भोलेनाथ को समर्पित है। यह गोमती नदी के किनारे बना है। यहां श्रावण मास में मेला लगता है। यहां पर लगभग हर समय शिव भक्तों द्वारा रामचरितमानस पाठ कराया जाता है।
