Gujarat Fuel Shortage : गुजरात के कच्छ जिले में पैदा हुआ डीजल का गंभीर संकट अब सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका सीधा और बड़ा असर देश के दो सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों—कांडला और मुंद्रा—के पोर्ट और ट्रांसपोर्ट उद्योग पर दिखने लगा है। ईंधन की इस भारी किल्लत के कारण व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में चिंता की लहर दौड़ गई है।
डीजल न मिलने की वजह से सैकड़ों ट्रक और भारी वाहन पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। इसके चलते माल ढुलाई का काम पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। यदि समय पर कंटेनर और जरूरी माल पोर्ट तक नहीं पहुंचे, तो आयात-निर्यात की पूरी प्रक्रिया में बड़ा विलंभ हो सकता है, जिससे उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ट्रांसपोर्ट कंपनियों के सामने बड़ा संकट
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि डीजल पाने के लिए उन्हें कई घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है, और उसके बाद भी जरूरत के मुताबिक ईंधन नहीं मिल पा रहा है। इस अनिश्चितता के कारण वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट कंपनियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जानकारों का मानना है कि अगर डीजल की आपूर्ति जल्द ही सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में देश की सप्लाइ चेन और पोर्ट आधारित उद्योगों को इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
इस नाजुक स्थिति को देखते हुए ट्रांसपोर्ट उद्योग के कारोबारियों ने सरकार से एक विशेष आर्थिक सहायता पैकेज घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि एक तरफ कारोबार ठप हो रहा है और दूसरी तरफ गाड़ियों की किस्त (EMI), बीमा और रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिसे उठाना अब उनके बस से बाहर हो रहा है।
इसके साथ ही, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने बैंकों से लोन की किस्तों को चुकाने की समय सीमा में ढील देने और दंडात्मक ब्याज (पेनल्टी) से पूरी तरह मुक्ति देने की भी अपील की है। एसोसिएशन का साफ कहना है कि अगर सरकार और बैंकों की तरफ से तुरंत राहत कदम नहीं उठाए गए, तो छोटे और मध्यम वर्ग के ट्रांसपोर्टर्स पूरी तरह से कर्ज के दलदल में डूब जाएंगे।
