Suhrawardy Avenue Renamed: पश्चिम बंगाल की राजनीति और इतिहास के लिहाज से एक बहुत बड़ा फैसला सामने आया है। कोलकाता नगर निगम ने शहर के पार्क सर्कस इलाके की एक बेहद प्रमुख सड़क 'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम बदलकर अब 'गोपाल मुखर्जी रोड' (Gopal Mukherjee Road) कर दिया है। 'पश्चिम बंगाल दिवस' के खास मौके पर लिए गए इस फैसले की जानकारी खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट शेयर करके दी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए लिखा, "अब समय आ गया है कि पश्चिम बंगाल अपने असली नायकों को याद करे, पुरानी गलतियों को सुधारे और उन्हें पूरा सम्मान दे।" उन्होंने कोलकाता नगर निगम के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि दशकों तक हमारे शहर की एक मुख्य सड़क का नाम एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर रहा, जिसने सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए मासूम नागरिकों के नरसंहार की साजिश रची थी। अब इस सड़क का नाम गोपाल मुखर्जी के नाम पर रखा जा रहा है, जिन्होंने दंगों के दौरान हजारों मासूमों की जान बचाने के लिए एक निडर रक्षक की भूमिका निभाई थी।
सड़क के नाम को लेकर क्या था इतिहास?
कोलकाता की इस प्रमुख सड़क के नाम को लेकर इतिहास में दो तरह के मत रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इस सड़क का निर्माण कलकत्ता इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने किया था और 20 अप्रैल 1933 को इसका नाम 'सर हसन सुहरावर्दी' के सम्मान में रखा गया था। सर हसन सुहरावर्दी कलकत्ता यूनिवर्सिटी के पहले मुस्लिम वाइस-चांसलर और एक प्रतिष्ठित मेडिकल प्रोफेशनल थे। इसी सड़क पर उनकी पारिवारिक संपत्ति 'कशाना' भी स्थित थी।
सुहरावर्दी 1946 के विभाजन के समय बंगाल के थे प्रीमियर
हालांकि, जनमानस में बहुत से लोग यह मानते आ रहे थे कि इस सड़क का नाम सर हसन के भतीजे 'हुसैन शहीद सुहरावर्दी' के नाम पर रखा गया था। हुसैन शहीद सुहरावर्दी 1946 के विभाजन के समय बंगाल के प्रीमियर (मुख्यमंत्री) थे। साल 1946 में हुए भयानक 'ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स' (कलकत्ता के दंगे) में उनकी कथित भूमिका के कारण उन्हें इतिहास में 'बंगाल का कसाई' भी कहा जाता है। अब नाम बदलने के इस फैसले से सालों पुराना यह विवाद खत्म हो गया है।
