कोलकाता

​Exclusive: बांग्लादेशी घुसपैठियों में समाया SIR का खौफ, कोलकाता में झुग्गियां छोड़कर भाग रहे, महिलाओं ने कैमरे पर कबूला सच

टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत में महिलाओं ने बताया कि वे बांग्लादेश के सातखिरा जिले के रहने वाले थे और अब बंगाल में आकर कूड़ा एकत्र करने और उसे री-साइकिल करने का काम करते हैं। बांग्लादेश से आए ज्यादातर परिवार इन बस्तियों में आकर बसे हैं। इन महिलाओं ने और चौंका देने वाले खुलासे किए।

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कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की भरमार।

Bangladeshi intruders: कोलकाता और इसके ईर्द-गिर्द अपना आशियाना बना चुके बांग्लादेशी घुसपैठियों को अब SIR का डर सता रहा है। SIR की प्रक्रिया शुरू होते ही ये अपनी झुग्गियों छोड़कर भागने लगे हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की टीम शुक्रवार को कोलकाता से महज 15 किलोमीटर न्यू टाउन पहुंची। स्मार्ट सिटी का दर्जा पाए यह इलाका एक तरह से अवैध बांग्लादेशी की कॉलोनी में तब्दील हो गया है। बांग्लादेश से आए नागरिक अवैध तरीके से भारत में पहले दाखिल हुए और फिर ईको पार्क के पास एक के बाद एक बस्तियों में आकर बस गए।

महिलाओं ने कबूला-वे बांग्लादेश से आईं

न्यू टाउन की मसूद बस्ती, बोन बीबी बस्ती में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रह रहे थे लेकिन अब SIR के डर से अवैध तरीके से रहने वाले ये बांग्लादेशी इलाके को छोड़कर भाग रहे हैं। हालांकि, आज भी कुछ बांग्लादेशी नागरिक इन बस्तियों में रह रहे हैं। इन्हीं में से दो बांग्लादेशी महिलाओं ने कैमरे के सामने आकर कबूला कि वे बांग्लादेश की नागरिक हैं। वे 10-12 साल पहले नदी पार करके भारत में दाखिल हुईं और तभी से यहीं रह रही हैं।

महिलाओं ने बताया-उनके पास आधार कार्ड भी है

टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत में उन्होंने बताया कि वे बांग्लादेश के सातखिरा जिले के रहने वाले थे और अब बंगाल में आकर कूड़ा एकत्र करने और उसे री-साइकिल करने का काम करते हैं। बांग्लादेश से आए ज्यादातर परिवार इन बस्तियों में आकर बसे हैं। इन महिलाओं ने और चौंका देने वाले खुलासे किए। महिलाओं ने बताया कि उनके पास आधार कार्ड भी हैं और उनके बच्चे स्कूल जाते हैं। परिवार के लोग कोलकाता के अलग-अलग हिस्सों में काम करते हैं।

SIR के डर से छिपे, क्या फिर वापस आएंगे?

वहीं, आस-पड़ोस के लोग जो भारतीय नागरिक हैं, वे बताते हैं कि SIR के डर से जो बांग्लादेशी यहां रह रहे थे, वे अब भाग रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई में ये बांग्लादेशी अपने देश लौट रहे हैं या फिर इस SIR के मौसम में कुछ दिनों के लिए कहीं जाकर छुप गए हैं? और इस प्रक्रिया के खत्म होते ही क्या वापस इन झुग्गी-झुपड़ी में लौट आएंगे? सवाल पश्चिम बंगाल सरकार और बंगाल पुलिस से भी है कि इतने सालों से अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों पर क्यों अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई?

Pooja Mehta
पूजा मेहताauthor

पूजा मेहता एक वरिष्ठ टेलीविज़न पत्रकार हैं, जिन्हें रिपोर्टिंग का लगभग 15 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने राजनीति, आतंकवाद, आंतरिक संघर्ष, रक्षा, पर्यावरण और अपराध पर व्यापक रिपोर्टिंग की है, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों पर गहरा फोकस रखते हुए। संघर्षग्रस्त इलाकों से उनकी ज़मीनी रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों की गहन समझ उन्हें पैनी दृष्टि और विश्वसनीय विश्लेषण के लिए अलग पहचान दिलाती है। वह प्रमाणित Defence Correspondent हैं और अमेरिकी विदेश विभाग के प्रतिष्ठित International Visitor Leadership Program (IVLP) की एलुमनी भी हैं, जिससे विदेशी नीति, सुरक्षा और सामरिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई है।

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