बेंगलुरु: डॉक्टर भगवान का ही दूसरा रूप होते हैं, जो किसी भी आसाधारण समस्या से पार पाने में सक्षम होते हैं। इसी तरह का जीता जागता उदाहरण बैंगलोर स्थित किंडर हॉस्पिटल में देखने को मिला, जहां डॉक्टरों की टीम ने 28 सप्ताह के प्रीमैच्योर अवस्था में जन्मे दो बच्चों, जिसमें एक वजन 750 ग्राम था को सफलतापूर्वक इलाज कर बचा लिया। बड़ी बात यह थी कि दोनों शिशु जुड़वां थे, जिस कारण चिकित्सकों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। क्योंकि जुड़वां बच्चों की गर्भनाल एक ही थी, जिसे 'ट्विन-टू-ट्विन ट्रांसफ्यूजन' कहा जाता है। इस दुर्लभ परिस्थिति में जुड़वा बच्चों के बीच रक्त का असामान्य बंटवारा था, जिसमें एक को एनीमिया, कम रक्त की कम मात्रा और निम्न रक्तचाप की शिकायत थी, जबकि दूसरे को लाल रक्त कोशिकाओं की अधिकता और रक्त की मात्रा और ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था। ऐसी स्थिति में दोनों बच्चों का जीवन खतरे में था, लेकिन डॉक्टर दूसरे नंबर वाले शिशु को बचाने में सफल रहे।
750 ग्राम के बच्चे को बचाया
हैरानी की बात यह है कि महज 28 हफ्ते में जन्मे 750 ग्राम के बच्चे को किंडर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक बचा लिया। मां के गर्भ में जुड़वां बच्चे थे। दूसरे बच्चे में भी वही प्लेसेंटा था। इसके कारण जुड़वा बच्चों के बीच खून का बंटवारा असामान्य हो गया। परिणामस्वरूप, शिशु एनीमिया, कम रक्त मात्रा और निम्न रक्तचाप से पीड़ित था। ऐसे में डॉक्टरों के लिए ये एक चुनौती बन गई। हालांकि, किंडर हॉस्पिटल के मशहूर डॉक्टर डॉ. सुशांत शिवस्वामी और उनकी टीम इस कठिन परिस्थिति से सफलतापूर्वक पार कर सके। प्रत्येक बच्चे का वजन 750 ग्राम था और उनका जन्म केवल 28 सप्ताह में हुआ था। लिहाजा, जन्म के तुरंत बाद नवजातों को आईसीयू में भर्ती कराया गया था।
बच्चे की हार्ट बीट थी असामान्य
हालांकि, मस्तिष्क में अत्यधिक रक्तस्राव के कारण पहले शिशु को बचाया नहीं जा सका। साथ ही दूसरा बच्चा भी एनीमिया की समस्या से पीड़ित था। उस शिशु की जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। लेकिन, शिशु का जीवन बचाने के लिए उसे सांस और निरंतर निगरानी के साथ हार्ट बीट का चलना आवश्यक था। ऐसे में डॉक्टरों ने ज्यादा सावधानी बरती और इलाज किया, जिससे दूसरे शिशु का जीवन सुरक्षित है।
शिशु का वजन हुआ 1.98 किलोग्राम
इस बारे में डॉ. सुशांत ने कहा कि जुड़वां बच्चों में से दूसरे को उचित निगरानी, उचित हार्ट पंपिंग और आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्यकता थी। इस संबंध में हमने उचित उपाय किए और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सफल इलाज किया। किंडर अस्पताल में उपलब्ध अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी सुविधाओं और विशेषज्ञों के प्रयासों ने समय से पहले जन्मे बच्चे के ठीक होने में अपना पूरा प्रयास किया। दो महीने के गहन उपचार के बाद शिशु का वजन 1.98 किलोग्राम हो गया। बाद में बच्चे के मस्तिष्क और आंखों का परीक्षण किया गया और फिर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
