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हिरासत में लिए गए 'Khan Sir' को पुलिस ने किया रिहा, BPSC परीक्षा को लेकर छात्र आंदोलन का कर रहे थे समर्थन

Khan Sir News: प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को पिछले वर्षों की तरह ही आयोजित करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को सामान्य बनाने की मांग कर रहे हैं।

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खान सर को पुलिस ने किया रिहा।

Photo : Twitter

Khan Sir News: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्राथमिक परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन का विरोध कर रहे छात्रों का समर्थन करने के बाद शुक्रवार को पुलिस ने जाने माने शिक्षक व यूट्यूबर खान सर को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, छात्रों की मांग और भारी विरोध के बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई, जिसके बाद देर रात गर्दनीबाग पुलिस स्टेशन से खान सर को रिहा कर दिया गया।

बता दें, बीपीएससी की परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन को लेकर छात्रों का विरोध-प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को शिक्षक खान सर का समर्थन मिला है। शुक्रवार को खान सर छात्रों का समर्थन करने के लिए बीपीएससी कार्यालय पहुंचे थे और सड़क पर उतरकर छात्रों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उन्हें गर्दनीबाग थाना ले जाया गया था। इसके अलावा छात्र नेता दिलीप को भी हिरासत में लिया गया था।

बढ़ गया छात्रों का गुस्सा

खान सर को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों का गुस्सा बढ़ गया है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन और तेज होने की आशंका जताई जा रही थी। सोशल मीडिया पर भी खान सर के समर्थन में छात्रों कई पोस्ट किए, जिसके बाद पुलिस बैकपुट पर आ गई और खान सर को रिहा करना पड़ा। बता दें, बीपीएससी के अभ्यर्थियों ने पटना में बीपीएससी कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया था। अभ्यर्थियों ने शहर में बेली रोड को भी जाम कर दिया, इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को तितर-बितर करने और व्यवस्था बहाल करने के लिए लाठीचार्ज किया।

क्या है छात्रों की मांग

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांग है कि नॉर्मलाइजेशन लागू नहीं होना चाहिए। छात्रों ने 'वन शिफ्ट, वन पेपर' की मांग की है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को पिछले वर्षों की तरह ही आयोजित करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को सामान्य बनाने की मांग कर रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि आयोग वही परीक्षा प्रक्रिया अपनाए जो निष्पक्षता और एकरूपता के लिए अपनाई जाती रही है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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