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प्रचंड गर्मी से कश्मीर में हाय तौबा, बंद किए गए स्कूल; तापमान ने तोड़ा 25 साल का रिकॉर्ड

Schools Closed in Kashmir: कश्मीर घाटी में इन दिनों गर्मी का कहर है। लिहाजा, प्रशासन ने 29 और 30 जुलाई को प्राथमिक कक्षाओं तक के सभी स्कूल बंद करने के निर्देश दिए हैं। आइये जानते हैं कहां पर कितना तापमान है?

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कश्मीर में गर्मी के कारण स्कूल बंद

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Schools Closed in Kashmir: देश में मॉनसून एक्टिव (Monsoon Active) हुए करीब एक महीने हो चुके हैं, लेकिन कई राज्य अभी अच्छी बारिश का मुंह नहीं देख पाए हैं। उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश के बाद उमस परेशान कर रही है। उधर, कश्मीर में बारिश न होने से हालात और बदतर होते जा रहे हैं। बारिश के इंतजार के बीच हीटवेव जैसी स्थिति है, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। लिहाजा, कश्मीर में अधिकारियों ने 29 और 30 जुलाई को प्राथमिक कक्षाओं तक के सभी स्कूल बंद करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल, यह आदेश अगले दो दिन के लिए है। अगर, हालात और बदतर हुए आगे भी इसे बढ़ाया जा सकता है।

25 साल का टूटा रिकॉर्ड

इन दिनों घाटी भीषण गर्मी की कहर से जूझ रही है और बढ़ती गर्मी से तत्काल कोई राहत नहीं मिल रही है। रविवार को श्रीनगर में तापमान 36.2 रिकॉर्ड किया गया, जो इस दशक में सबसे ज्यादा है। घाटी के कई इलाकों में रविवार को 25 साल में जुलाई का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया है। इससे पहले यहां 9 जुलाई 1999 को सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया था। तब अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीनगर में सबसे गर्म जुलाई का दिन 10 जुलाई 1946 को दर्ज किया गया था। तब यहां का तापमान 38.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। उधर, दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड और कोक और कोकरनाग कस्बों में भी रविवार सबसे गर्म जुलाई का दिन रहा।

बारिश का अलर्ट

हालांकि, मौसम विभाग ने घाटी में अगले 24 घंटों में अलग-अलग स्थानों पर बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है, जिससे तापमान में गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, कई इलाकों में शनिवार रात भी हल्की बारिश हुई है। लेकिन, तेज बारिश न होने के कारण तापमान में कोई फर्क नहीं पड़ रहा है और लोग गर्मी के कहर से परेशान हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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