जयपुर : बारिश गर्मी से राहत तो देती है, लेकिन कई समस्याएं भी खड़ी करती है। खासकर जलभराव...जो स्थानीय प्रशासन के तमाम विकास के दावों पर तमाचा जैसा होता है। ऐसी ही एक तस्वीर जयपुर से सामने आई है जो विकास के तमाम दावों की पोल खोल रही है। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के विधानसभा क्षेत्र झोटवाड़ा की एप्रूव्ड कॉलोनियों में सड़कें अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। जगह-जगह टूटी सड़कें और बड़े-बड़े गड्ढे स्थानीय लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुके हैं। हालांकि, स्थानीय जनता कई बार प्रदर्शन कर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को समस्या ठीक करने के लिए कहा है, लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। ऐसी स्थिति में लोगों ने फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
बदहाल सड़कों और गड्ढों का जाल
झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की एप्रूव्ड कॉलोनियों में सड़कों की हालत बेहद दयनीय है। स्थिति यह है कि कई जगहों पर सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं, तो कहीं गहरे गड्ढे चालकों और राहगीरों के लिए हर पल का खतरा बन गए हैं। इन गड्ढों के कारण रोजाना छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में यह समस्या और भी ज्यादा खतरनाक हो जाती है, क्योंकि सड़कों के गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का बिल्कुल अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे वाहन चालक अक्सर चोटिल होते हैं।
शिकायतों के बाद भी नतीजा नहीं बदला
स्थानीय नागरिकों का दर्द है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। इस बदहाली को लेकर वे कई बार संबंधित विभागों में शिकायतें दर्ज करा चुके हैं और कई बार सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन भी कर चुके हैं। इसके बावजूद इन टूटी सड़कों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जनता का सवाल है कि जब वे बार-बार सड़क पर उतरकर अपनी इस गंभीर परेशानी को बयां कर रहे हैं, तो आखिर जिम्मेदारों की नजर इन पर कब पड़ेगी?
व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
कहा जाता है कि 'सड़कें किसी भी शहर की तरक्की का आईना होती हैं,' लेकिन झोटवाड़ा की यह तस्वीर इस कहावत के बिल्कुल उलट नजर आती है। सवाल सिर्फ एक टूटी सड़क का नहीं है, बल्कि उस लचर व्यवस्था का है जहां समस्या आंखों के सामने होने के बावजूद समाधान का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
एक पुरानी कहावत है- 'देर आए, दुरुस्त आए।' लेकिन स्थानीय जनता अब यह पूछने पर मजबूर है कि आखिर यह 'दुरुस्ती' आएगी कब? जनता ने तो सड़क पर उतरकर अपनी बात मजबूती से रख दी है, लेकिन अब गेंद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के पाले में है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन टूटी सड़कों की मरम्मत कब होगी? इन जानलेवा गड्ढों से आम जनता को राहत कब मिलेगी? और कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के विधानसभा क्षेत्र में विकास की यह बदहाल तस्वीर आखिरकार कब बदलेगी? क्योंकि सड़कों पर पड़े ये गड्ढे सिर्फ डामर उखड़ने की निशानी नहीं हैं, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
