Jharkhand IAS IPS Transfer: झारखंड सरकार ने नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) में फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 65 अधिकारियों का तबादला किया है। इसके साथ ही उन्हें नई नियुक्तियां दी हैं तथा अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। बता दें कि, शुक्रवार रात जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, 17 जिलों में नए उपायुक्त (Deputy Commissioner) नियुक्त किए गए हैं।
किसे मिली क्या जिम्मेदारी?
अधिसूचना में कहा गया है कि 2013 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव रंजन को पूर्वी सिंहभूम जिले का उपायुक्त बनाया गया है, जबकि 2014 बैच के अधिकारी संदीप कुमार को लातेहार का उपायुक्त नियुक्त किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 2017 बैच के अधिकारी शशि प्रकाश सिंह को देवघर का उपायुक्त नियुक्त किया गया है। इसी के साथ, हेमंत सती को हजारीबाग का उपायुक्त और मनीष कुमार को पश्चिमी सिंहभूम का उपायुक्त बनाया गया है।
अधिसूचना और क्या बताया गया?
अधिसूचना के मुताबिक, लोकेश मिश्रा को गोड्डा का उपायुक्त और मेघा भारद्वाज को पाकुड़ का उपायुक्त नियुक्त किया गया है। गृह, कारागार एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) माइकल राज एस को पुलिस महानिरीक्षक (रेल) बनाया गया है, जबकि पलामू जोन के आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा को बोकारो का आईजी नियुक्त किया गया है।
आईजी सुनील भास्कर का तबादला यहां हुआ
वहीं, बोकारो के आईजी सुनील भास्कर का तबादला झारखंड सशस्त्र पुलिस में किया गया है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) निधि दुबे को मुकेश कुमार के स्थान पर सरायकेला-खरसावां का नया एसपी बनाया गया है, जबकि मुकेश कुमार को रामगढ़ का एसपी नियुक्त किया गया है। बताया जा रहा है कि, रांची ग्रामीण के एसपी प्रवीण पुष्कर को देवघर का एसपी बनाया गया है और अजय कुमार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का एसपी नियुक्त किया गया है।
महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने पर कांग्रेस पर निशाना
वहीं, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के लिए कांग्रेस और 'इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) गठबंधन के अन्य घटक दलों की कड़ी आलोचना की। पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कहा कि महिलाओं को उचित अधिकार देने के मामले में "तथाकथित महिला-हितैषी दलों" का असली रंग सामने आ गया है।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने लोकसभा में विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना करते कहा कि यह नारी शक्ति का ’’अपमान’’ है। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के चुनावों से लागू करने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया। सदन में ’संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी।
(इनपुट - भाषा)
