मदरसा बोर्ड में कार्यरत तीन पैराटीचर्स के फर्जीवाड़े का अजम मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार यह पैराटीचर्स विदेश में रह रहे हैं और राजस्थान में मदरसा बोर्ड से मानदेय उठा रहे हैं। इन तीनों पैराटीचर्स की नियुक्ति झुंझुनूं जिले में हुई है। यह उन 5562 पैराटीचर्स में शामिल हैं, जिन्हें नियमित करने की प्रक्रिया चल रही थी।
यह मामला विधानसभा चुनाव से पहले 3699 प्राइवेट मदरसों में नियुक्ति आदेशों के संदेर्भ में आया है। जिन पर तत्कालीन सचिव और बोर्ड अध्यक्ष के दस्तखत भी हैं। बोर्ड ने सभी जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे मदरसों में तैनात पैराटीचर्स के दस्तावेजों की जांच करें।
इन मदरसों में है नियुक्ति
जिन तीन पैराटीचर्स के बारे में रिपोर्ट है कि वह बच्चों को बढ़ाने की बजाय विदेश में रहकर मानदेय उठा रहे हैं उनकी नियुक्ति मदरसा धनूरी-कायमसर, मदरसा इस्लामियां मलसीसर और मदरसा अंजुमन हिमायतुल नवलगढ़ में है। इनके बारे में पता चला है कि यह पैराटीचर्स बिना सूचना के विदेश चले गए थे। जिनमें से एक के अब वापस आने की भी सूचना है।
सरकार देती है मानदेय
बड़ी बात तो यह है कि मदरसा बोर्ड के पास यह भी जानकारी नहीं है कि इन तीनों की छुट्टियां किसने मंजूर कीं। बता दें कि मदरसों में नियुक्त पैराटीचर्स प्राइवेट जरूर हैं, लेकिन उनको मानदेय सरकार देती है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार बोर्ड के मौजूदा सचिव चेतन चौहान ने बताया कि नियुक्ति फाइलों पर केवल अभ्यर्थियों के दस्तखत हैं, किसी अधिकारी या कमेटी के हस्ताक्षर नहीं हैं।
शुरुआती जांच के अनुसार तीन पैराटीचर्स विदेश गए और इस दौरान उन्होंने मानदेय उठाया। अब सभी 5562 पैराटीचर्स की नियुक्तियों की जांच की जाएगी। ज्ञात हो कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले 3699 मदरसों में 5562 पैराटीचर्स को कॉन्ट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल रूल्स 2022 के तहत शामिल किया गया था।
