जयपुर

जयपुर : शहरों-नगरों तक पहुंचेगा PNG-CNG नेटवर्क, सरकार ने दी CGD नीति को मंजूरी

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राजस्थान सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नीति -2025 को मंजूरी दी है। इस नई नीति के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए अनुमति, भूमि आवंटन और अनुमोदन की प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया जाएगा।

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सीएम भदन लाल शर्मा (तस्वीर साभार-ट्विटर @BhajanlalBjp)

जयपुर : राजस्थान सरकार ने छोटे शहरों और नगरों में पीएनजी और सीएनजी नेटवर्क के विकास के लिए राजस्थान सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नीति -2025 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए नए अवसर उत्पन्न होंगे। इसके अलावा, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के लिए 3 केंद्रीय पीएसयू के साथ ज्वाइंट वेंचर कंपनियों की स्थापना की जाएगी, जिससे 11,200 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यह कदम बिजली की पीक लोड डिमांड को पूरा करने में मदद करेगा और प्रदेश के वित्तीय भार को कम करेगा।

कितनी छूट?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में कर्मचारियों के लिए दो वर्ष की सेवा अवधि में छूट का लाभ देने का निर्णय लिया गया है, जिसमें केवल उन कर्मचारियों को बाहर रखा जाएगा, जिन्होंने पिछले दो वित्तीय वर्षों में अनुभव में छूट का लाभ लिया है। इसके अलावा, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को एम्स दिल्ली की तर्ज पर उन्नत करने के लिए अध्यादेश लाया जाएगा, जिससे राजस्थान इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की स्थापना की जाएगी।

रिक्तियों में 100% तक वृद्धि का प्रावधान किया गया है, जिससे चयन प्रक्रिया में सुधार होगा। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) का प्रबंधन अब 'राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर जयपुर सोसाइटी' के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गवर्निंग बोर्ड का गठन होगा। इसके साथ ही, पशु चिकित्सा कर्मियों के पदनाम परिवर्तन का निर्णय भी लिया गया है, जो पूर्व की कैबिनेट में पहले ही किया गया था।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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