जयपुर

Jaipur: गणगौरी अस्पताल में रचा इतिहास, लेप्रोस्कोपिक ट्राइकोबेजोआर सर्जरी से बची महिला की जान

जयपुर के गणगौरी अस्पताल में डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में अद्भुत उपलब्धि हासिल की है। एक 35 वर्षीय महिला के पेट से 6 किलो वजनी बालों का गुच्छा (ट्राइकोबेजोआर) सफलतापूर्वक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा निकाला गया। यह राजस्थान की पहली लेप्रोस्कोपिक ट्राइकोबेजोआर सर्जरी मानी जा रही है।

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जयपुर के डॉक्टरों ने महिला के पेट से निकाला 6 किलो का बालों का गोला

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Jaipur News: चिकित्सा जगत में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जो चिकित्सकों के अनुभव और साहस की अनूठी मिसाल बन जाते हैं। राजधानी जयपुर के गणगौरी अस्पताल के डॉक्टरों ने ऐसा ही एक कारनामा कर दिखाया है। यहां के डॉक्टरों ने 35 वर्षीय महिला के पेट से 6 किलो वजनी बालों का गुच्छा (हेयर बॉल ट्राइकोबेजोआर) सफलतापूर्वक निकालकर न सिर्फ मरीज की जान बचाई बल्कि चिकित्सा इतिहास में नया अध्याय भी जोड़ दिया। दावा किया जा रहा है कि यह राजस्थान की पहली लेप्रोस्कोपिक ट्राइकोबेजोआर सर्जरी है।

तीन साल से हो रही थी तकलीफ

अस्पताल के सर्जरी विभाग के वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया कि महिला पिछले तीन साल से लगातार पेट दर्द, सूजन और खाने में कठिनाई जैसी समस्याओं से जूझ रही थी। कई बार दवाइयों और जांचों के बाद भी उसकी परेशानी कम नहीं हुई। जब विस्तृत जांच हुई तो पता चला कि महिला के आमाशय और छोटी आंत के पास बड़े आकार का बालों का गुच्छा जमा हो चुका है, जिसे चिकित्सा की भाषा में ट्राइकोबेजोआर कहते हैं।

चुनौतीपूर्ण था ऑपरेशन

डॉ. शर्मा ने बताया कि यह सर्जरी आसान नहीं थी। दरअसल, महिला का पहले भी पेट में गांठ का ऑपरेशन हो चुका था, ऐसे में दोबारा दूरबीन पद्धति (लेप्रोस्कोपिक सर्जरी) से ऑपरेशन करना जोखिम भरा था। बावजूद इसके, डॉक्टरों की टीम ने हिम्मत दिखाई और बिना पेट पर बड़ा चीरा लगाए, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर 6 किलो वजनी बालों का गुच्छा बाहर निकाल दिया। ऑपरेशन सफल होने के बाद महिला की हालत स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही है। संभावना है कि गुरुवार तक उसे अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी।

दुर्लभ बीमारी है ट्राइकोबेजोआर

ट्राइकोबेजोआर एक दुर्लभ रोग है, जिसमें मरीज अक्सर अपने ही बाल खा लेता है और ये बाल धीरे-धीरे पेट में जाकर एक बड़े गोले का रूप ले लेते हैं। समय रहते इलाज न हो तो यह गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता है। यह बीमारी खासकर उन मरीजों में देखी जाती है, जो मानसिक तनाव या विशेष मनोवैज्ञानिक विकारों से गुजर रहे होते हैं।

डॉक्टरों की टीम ने रचा रिकॉर्ड

गणगौरी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लिनेश्वर हर्षवर्धन ने बताया कि इस ऐतिहासिक सर्जरी को सफल बनाने वाली टीम में सर्जरी विभाग से डॉ. संजय, डॉ. कमलेश, डॉ. वीरेंद्र, डॉ. शहादत अली और डॉ. लुकमान शामिल रहे। वहीं एनेस्थिसिया विभाग से डॉ. हर्ष, डॉ. वीना और डॉ. रवि के साथ अन्य स्टाफ ने भी अहम भूमिका निभाई।

चिकित्सा क्षेत्र में नई उम्मीद

गणगौरी अस्पताल की इस उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित किया है कि राजस्थान के सरकारी अस्पताल भी जटिल और दुर्लभ मामलों को सफलतापूर्वक संभालने में सक्षम हैं। इस सर्जरी ने न केवल चिकित्सा जगत को प्रेरित किया है बल्कि मरीजों और उनके परिजनों को भी भरोसा दिलाया है कि सही समय पर आधुनिक तकनीक और टीमवर्क के जरिए गंभीर से गंभीर समस्या का समाधान संभव है।

Lakhveer Singh Shekhawat
लखवीर सिंह शेखावतauthor

पत्रकारिता में पिछले सात साल से सक्रिय हैं, वर्तमान में Times Now नवभारत में राजस्थान ब्यूरो हेड हैं। इससे पहले, ज़ी मीडिया और न्यूज़18 नेटवर्क के राजस्थान चैनल के लिए दिल्ली ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य किया है। उन्होंने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से बीजेएमसी की डिग्री प्राप्त की और राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी में डिग्री हासिल की है। राजस्थान से संबंधित समाचारों और ख़बरों पर विशेष पकड़ रखते हैं। साथ ही देश की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं को कवर करने में भी विशेषज्ञता हासिल है।

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