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जयपुर कैश कांड में बड़ा एक्शनः DOIT अफसर सस्पेंड, पास से मिले थे 2.31 करोड़, जानिए क्या है पूरा केस

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 22, 2023, 09:54 AM IST

Jaipur News: शुक्रवार को पुलिस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने योजना भवन स्थिति सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के दफ्तर में छापेमारी की थी। अलमारी से बड़ी मात्रा में 2000 और 500 के नोट बरामद किए गए थे। जब जांच हुई तो पता चला कि 2.31 करोड़ अलमारी में था। इसके अलावा 1 किलो सोने के बिस्कुट बरामद किए गए थे।

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कैश कांड के बाद DOIT अधिकारी निलंबित

Photo : ANI

Jaipur News: राजस्थान के जयपुर से हैरान कर देने वाला कैश कांड सामने आने के बाद गहलोत सरकार की ओर से बड़ा एक्शन लिया गया है। सरकार ने इस कैश कांड के आरोपी और सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DOIT) के संयुक्त निदेशक वेद प्रकाश यादव को निलंबित कर दिया गया है। सरकार की ओर से यह एक्शन एक दिन पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद लिया गया है।

बता दें, पुलिस ने शुक्रवार को उनकी अलमारी से 2.31 करोड़ रुपये नकद और लगभग 1 किलो सोने के बिस्कुट बरामद किए थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंप दिया था।

सामने आया था सीसीटीवी

शुक्रवार को पुलिस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने योजना भवन स्थिति सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के दफ्तर में छापेमारी की थी। इस दौरान अधिकारियों ने एक अलमारी खोली तो आंखे फटी की फटी रह गई। अलमारी से बड़ी मात्रा में 2000 और 500 के नोट बरामद किए गए थे। जब जांच हुई तो पता चला कि 2.31 करोड़ अलमारी में था। इसके अलावा 1 किलो सोने के बिस्कुट बरामद किए गए थे। हालांकि, तब यह नहीं पता चल पाया था कि यह कैश किसका था, लेकिन बाद में एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें विभाग के संयुक्त निदेशक वेद प्रकाश यादव एक लैपटॉप बैग को ऑफिस के बेसमेंट में रखी एक अलमारी में रखते नजर आए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

टेंडर के बदले ली गई थी रकम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जब इस मामले में पूछताछ की तो संयुक्त निदेशक वेद प्रकाश यादव टाल-मटोल करते रहे, लेकिन जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उन्होंने रिश्वत लेने की बात कबूल की। अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह रकम अलग-अलग ठेकेदारों से विभिन्न निविदाओं के बदले ली गई है। वहीं यादव ने 2016 में नोटबंदी के दौरान करीब 38 लाख रुपये से अलमारी में मिला सोने खरीदा था। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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