Holi Festival 2023: जीवन में अगर रंग ना हो तो सब सूना सूना सा लगता है। यहीं वजह है कि होली का त्योहार हमारे जीवन में सतरंगी खुशियों का समावेश करता है। हालांकि अब होली के रंग घातक रसायनों वाले हो गए हैं, जिसके चलते लोग अब इनसे परहेज करने लगे हैं। यही वजह है कि, धीरे- धीरे फिर से वही पुराना दौर लौटने लगा है, जिसमें प्राकृतिक तौर पर कलर्स बनाए जाते थे। लोग अब हर्बल व ऑर्गेनिक रंगों की ओर आकर्षित होने लगे हैं। कोरोना महामारी के बाद लोग इस बार जमकर होली खेलने के मूड में हैं।
बाजार भी ग्राहकों से गुलजार होने लगे हैं। दुकनों पर इस बार नई तरह की पिचकारियां व हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों की भरमार है। लोगों की होली की खुशियां बरकरार रहे व वे घातक रसायनों से बचें इसके लिए राजधानी जयपुर के निकट एक गांव जुटा हुआ है। यहां पर महिलाएं गोबर से गुलाल व अन्य सामान बना रही हैं। इसके लिए पूरे 64 परिवार दिन रात मेहनत कर रहे हैं। हालांकि पहले ये महिलाएं गाय- भैंस चराने सहित खेती का काम करती थीं। मगर अब गोयम गुलाल बना रहीं है तो इनकी तकदीर भी संवरी है।
