जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा अमायरा की सुसाइड के मामले ने एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के करीब 20 दिन बाद अमायरा का परिवार पहली बार मीडिया के सामने आया और स्कूल प्रशासन, टीचर, प्रिंसिपल और संचालक पर गंभीर आरोप लगाए।
'मेरी बेटी की मौत एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है' बोले पिता
परिवार ने आरोप लगाया कि अमायरा को लंबे समय से स्कूल में बुलिंग का सामना करना पड़ रहा था। कई बार शिकायत करने के बावजूद टीचर्स और मैनेजमेंट ने कोई कार्रवाई नहीं की।परिवार के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में भी साफ दिखाई देता है कि कुछ छात्र अमायरा को परेशान कर रहे हैं और वह शिक्षिका से मदद मांग रही है, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया।
'स्कूल पर गंभीर आरोप: रसूख के दम पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश'
परिवार ने आरोप लगाया कि स्कूल संचालक अत्यधिक प्रभावशाली हैं। इसी वजह से पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच निष्पक्ष तरीके से आगे नहीं बढ़ रही। परिवार का कहना हैहमें पुलिस और शिक्षा विभाग से इंसाफ की कोई उम्मीद नहीं है। जांच पक्षपातपूर्ण है और आरोपी बचाए जा रहे हैं।
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'CBI जांच की मांग, हाईकोर्ट जाने की तैयारी'
परिवार ने राजस्थान सरकार से इस मामले की CBI जांच की आधिकारिक सिफारिश करने की मांग की है। अमायरा के पिता ने कहाअगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो हम हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। हमने कानूनी सलाह ले ली है और दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
•नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता रद्द की जाए
•स्कूल को बंद किया जाए
•बच्चों को अन्य स्कूलों में शिफ्ट किया जाए
परिवार का कहना है कि “हमारी बेटी वापस नहीं आ सकती, लेकिन दूसरे बच्चों की जान बचाई जा सकती है।”
'22 नवंबर को शहर में कैंडल मार्च और धरना'
न्याय की मांग को लेकर परिवार ने 22 नवंबर को बड़ा आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। जयपुर के शहीद स्मारक पर शांतिपूर्ण धरनादिया जाएगा। और शाम को शहर में कैंडल मार्च निकाला जाएगा।अमायरा के परिजनों नेअभिभावकों और छात्रों से शामिल होने की अपील की है। परिवार का कहना है यह सिर्फ अमायरा का मामला नहीं है। यह उन सभी बच्चों की लड़ाई है जिन्हें स्कूलों में बुलिंग, दबाव और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है।
मामला क्यों है महत्वपूर्ण?
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या स्कूल बुलिंग रोक पाने में नाकाम हो रहे हैं? क्या शिक्षा संस्थान सिर्फ फीस वसूलने तक सीमित हैं?बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी है? अमायरा के परिवार का कहना है—“हम न्याय चाहते हैं, प्रतिशोध नहीं।
'CBSE ने स्कूल को जारी किया है नोटिस'
वहींCBSE स्कूल को नोटिस जारी कर चुका है और बड़े दंड की संभावना है। अब पूरा मामला इस बात पर टिका है किक्या राज्य सरकार CBI जांच की मांग स्वीकार करेगी?क्या न्यायिक हस्तक्षेप होगा?और क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में यह बड़ा मोड़ बनेगा? क्योंकियह मामला अब सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों की जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है।
'CBSE की जांच समिति में बड़े खुलासे'
CBSE के सामने अमायरा केस आने के बाद बोर्ड ने दो-सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। जिसमें छानबीन के दौरान पाया कई बातों की जानकारी सामने आई जो निरीक्षण के दौरान स्कूल में नियमों के गंभीर उल्लंघन और बाल सुरक्षा में लापरावाही की तरफ इशारा कर रही थी। घटना की जांच के बाद, सीबीएसई (CBSE) की दो-सदस्यीय समिति ने स्कूल निरीक्षण में चौंकाने वाली लापरवाही उजागर की। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्कूल प्रशासन ने न केवल सुरक्षा नियमों की अनदेखी की, बल्कि एक छात्रा की लगातार बुलिंग (उत्पीड़न) की शिकायतों पर भी 18 महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की।