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17 दिन 16 रातें...नामी तीर्थ स्थलों की सैर कराएगी ये स्पेशल ट्रेन; एक बार में पूरी होगी सपनों की यात्रा

भारत गौरव यात्रा के तहत रामायण सर्किट पर्यटक ट्रेन 17 दिनों और 16 रातों की यात्रा पर 25 जुलाई से दिल्ली स्थिति सफदरजंग स्टेशन से निकलेगी। यह ट्रेन विशेष पैकेज के तहत भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या, देवी सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी से जनकपुर, नंदीग्राम, बक्सर, वाराणसी, नासिक, हम्पी होते हुए तमिलनाडु के रामेश्वरम के दर्शन कराएगी।

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रामायण सर्किट पर्यटक ट्रेन (फाइल फोटो)

भारतीय रेलवे देशभर के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा कराने के उद्देश्य से रामायण सर्किट पर्यटक ट्रेन चलाने का प्लान शेयर किया है। रामायण सर्किट पर्यटक ट्रेन भारत गौरव डीलक्स एसी पर्यटक ट्रेन के रूप में भी जाना जाता है। रेलवे के मुताबिक, 25 जुलाई 2025 को दिल्ली से रामायण सर्किट पर्यटक ट्रेन का संचालन किया जाएगा। यह ट्रेन भारतीय रेलवे की ‘भारत गौरव यात्रा’ पहल का एक हिस्सा है। इस ट्रेन के संचालन से पूरे देश की यात्रा करने का सपना लिए बैठे लोगों को बेहद फायदा होगा।

रामायण सर्किट पर्यटक ट्रेन का रूट मैप

रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक, सूचना एवं प्रचार, दिलीप कुमार के मुताबिक, 17 दिन/16 रात का यह दौरा दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से शुरू होगा, जिसमें भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या, देवी सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी से जनकपुर, नंदीग्राम, बक्सर, वाराणसी, नासिक, हम्पी होते हुए तमिलनाडु के रामेश्वरम तक का सफर तय किया जाएगा।

रामायण सर्किट पर्यटक ट्रेन टिकट बुकिंग

यात्रा के दौरान यात्रियों को शाकाहारी भोजन परोसा जाएगा। साइट सीइंग का काम वॉल्वो बसों से किया जाएगा, साथ ही IRCTC द्वारा अन्य विश्वस्तरीय सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इस ट्रेन का पैकेज लेने के लिए के लिए यात्री IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट से बुकिंग कर सकते हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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