निरुपम ने अपनी ही पार्टी से ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सरनाईक के 1 मई से मुम्बई से सटे मीरा-भायंदर में ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा में बोलने,लिखने और पढ़ने के अनिवार्यता वाले आदेश का विरोध किया है। निरुपम ने मंत्री को पत्र लिखकर दोबारा फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
इसी सिलसिले में निरुपम आज मुम्बई के दहिसर में कुछ ऑटोवालों से मिलने पहुचे थे। इसी दौरान मनसे कार्यकर्ता वहा पहुचकर निरुपम के खिलाफ नारेबाजी की। Nirupam go back..एक ही भाषा मराठी भाषा..के नारे लगाए। मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने दोनो तरफ के कार्यकर्ताओं को संभाला, संजय निरुपम को पुलिस ने मौके से सुरक्षित निकाला।हालात फिलहाल नियंत्रण में है..पुलिस ने कुछ मनसे कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है।
मुंबई में हाल ही में भाषा संबंधी विवाद ने फिर जोर पकड़ लिया है। इस बार मुख्य कारण महाराष्ट्र सरकार का वह फैसला है जिसके तहत ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। 1 मई, 2026 (महाराष्ट्र दिवस) से इसे कड़ाई से लागू करने की तैयारी है।
'ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को बुनियादी मराठी आनी चाहिए'
राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि राज्य में सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को बुनियादी मराठी आनी चाहिए। सरकार का तर्क है कि इससे यात्रियों और ड्राइवरों के बीच संवाद आसान होगा और शिकायतों में कमी आएगी।
'जो ड्राइवर इस भाषाई दक्षता परीक्षा में असफल होंगे, उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं'
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, जो ड्राइवर इस भाषाई दक्षता परीक्षा में असफल होंगे, उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) के माध्यम से जांच अभियान चलाया जाएगा। बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार ने यह भी घोषणा की है कि जो ड्राइवर मराठी नहीं जानते, उन्हें बुनियादी मराठी सिखाने के लिए मुफ्त मराठी कक्षाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
