Himachal Pradesh Panchayati Raj Elections: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों की तारीखों का ऐलान हो गया है। स्टेट इलेक्शन कमिश्नर अनिल कुमार खाची ने कहा कि पंचायती राज चुनाव तीन फेज में इंडिपेंडेंट इलेक्शन के सिंबल के आधार पर होंगे। खाची ने कहा, 'किसी भी कैंडिडेट को उनका पसंदीदा इलेक्शन सिंबल अलॉट नहीं किया जाएगा।'
इलेक्शन प्रोग्राम का नोटिफिकेशन 29 अप्रैल, 2026 यानी आज जारी किया जाएगा और आज ही की तारीख में डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर, पंचायत भी एक नोटिस जारी करेंगे। खाची ने बताया कि राज्य में 75 में से कम से कम 22 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव नहीं हो पाएंगे, क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग को उनके लिए आरक्षण रोस्टर सरकार से प्राप्त नहीं हुआ है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में हमीरपुर, बद्दी और ऊना नगर परिषदों का दर्जा बदलकर नगर निगम कर दिया था और नियमों के अनुसार इनके चुनाव दो वर्ष के भीतर कराए जाने थे। खाची ने मंगलवार को कहा कि चुनाव कराने के लिए मतदाता सूची का अंतिम रूप देना और राज्य सरकार द्वारा आरक्षण रोस्टर जारी करना दो अहम शर्तें हैं।
उन्होंने बताया कि 22 शहरी स्थानीय निकायों के लिए आरक्षण रोस्टर सरकार से प्राप्त नहीं हुआ और आयोग उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के मद्देनजर अधिक प्रतीक्षा नहीं कर सकता था, इसलिए अन्य निकायों में चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
वोटिंग कब होगी?
स्टेट इलेक्शन कमिश्नर ने कहा, 'नॉमिनेशन जमा करने की तारीख 7, 8, और 11 मई सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक होगी। नॉमिनेशन पेपर्स की स्क्रूटनी 12 मई, 2006 को सुबह 10:00 बजे से होगी। वोटिंग तीन फेज में होगी: पहला फेज 26 मई को, दूसरा 28 मई को, और तीसरा 30 मई को...'
इस घोषणा के साथ ही, ग्रामीण इलाकों में आदर्श आचार संहिता (MCC) तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। खाची ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को 31 मई तक पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है।
50 लाख से ज्यादा वोटर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे
विस्तृत जानकारी देते हुए अनिल खाची ने बताया कि इन चुनावों में कुल 50,79,048 वोटर हिस्सा लेंगे। इस प्रक्रिया के तहत 21,654 वार्ड सदस्यों, 1,769 पंचायत समिति सदस्यों और 251 जिला परिषद सदस्यों का चुनाव किया जाएगा।
महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षण
पंचायती राज व्यवस्था में कुल 31,182 पदों में से 15,656 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं, जो समावेशी भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक मजबूत कदम है। कुल्लू जिले की चार पंचायतों में चुनाव नहीं होंगे, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार ही होंगे। अधिकारियों ने जिला चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि चुनाव शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न हों।
