‘5 मिनट में बच सकता था मेरा बेटा’: रुंधे गले से छलका पिता का दर्द; बोले- नाव-रस्सा, सेफ्टी जैकेट सब था फिर क्यों..?
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 18, 2026, 10:38 PM IST
टाइम्स नाउ की टीम ने मृतक के पिता से हादसे के बारे और पुलिस-प्रशासन द्वारा राहत कार्य के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि युवराज ने खुद को बचाने के लिए पूरा संघर्ष किया, लेकिन गहरे नाले में वो अपने आप को बचा नहीं सका। उसे जो बाहरी सपोर्ट मिलना चाहिए था वो उसे कुछ भी नहीं मिला। जो नोएडा अथॉरिटी या एनडीआरएफ की टीम थी वो प्रॉपर अपना इंफ्रास्ट्रक्चर उसको प्रोवाइड नहीं करा पाई। उन्होंने बेटे की मौत के लिए नोएडा अथॉरिटी को जिम्मेदार ठहराया।
युवराज मेहता के पिता ने लगाए नोएडा अथॉरिटी पर गंभीर आरोप।
नोएडा में शुकवार रात घने कोहरे और सिस्टम की लापरवाही के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार समेत गहरे गड्डे में डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद प्रशासन और राहत बचाव कर्मियों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इस घटना ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। लोग प्रशासन को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस बीच टाइम्स नाउ नवभारत ने मृतक के पिता राजकुमार मेहता से बातचीत की। इस दौरान टाइम्स नाउ ने उनसे मौके पर क्या हुआ था ये जानने की कोशिश की। इस पर उन्होंने भी साफ शब्दों में इसे फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, एडीआरएफ और पुलिस की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि जो बाहरी सपोर्ट उनके बेटे को मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला, जिसके कारण मदद की गुहार लगाते-लगाते आखिरकार युवराज ने दम तोड़ दिया।
बेटे की मौत के बाद क्या बोले राजकुमार मेहता?
जब टाइम्स नाउ की टीम ने उनसे हादसे के बारे और पुलिस-प्रशासन द्वारा राहत कार्य के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि युवराज ने खुद को बचाने के लिए पूरा संघर्ष किया, लेकिन गहरे नाले में वो अपने आप को बचा नहीं सका। उसे जो बाहरी सपोर्ट मिलना चाहिए था वो उसे कुछ भी नहीं मिला। जो नोएडा अथॉरिटी या एनडीआरएफ की टीम थी वो प्रॉपर अपना इंफ्रास्ट्रक्चर उसको प्रोवाइड नहीं करा पाई। उन्होंने बेटे की मौत के लिए नोएडा अथॉरिटी को जिम्मेदार ठहराया। राजकुमार मेहता ने कहा कि नोएडा अथारिटी इसके लिए रिस्पांसिबल है क्योंकि इससे पहले भी वहां पर एक ट्रक का इंसिडेंट हुआ था, जिसके बाद उनको वहां पर सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिए थे, जो नहीं हुआ।
टर्निंग प्वांइट पर इंडिकेटर होता तो...
बेहद गमगीन राजकुमार मेहता ने बताया कि अगर वो वहां इंडिकेटर होता टर्निंग पे मेरा बेटा उसके सामने जाता ही नहीं, फॉग में भी वह चमकता साइन होता और वो राइट टर्न ले लेता। मृतक के पिता ने बताया कि वो काफी डेंजरस मोड़ है वो पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।
किसी ने बचाने के लिए ट्राई नहीं किया
बचाव उपायों को लेकर उन्होंने कहा कि ये बचावकर्मियों की लापरवाही से हुआ। लड़के को बचाने में पांच मिनट लगते अगर कोई थोड़ी सी भी कोशिश करता।उनका बेटा बिल्कुल सेफ जगह बैठा था गाड़ी पर। फायर ब्रिगेड वालों के पास सेफ्टी जैकेट भी थी, नाव भी थी, 100 मीटर का रस्सा भी था और मात्र 25 कदम दूरी पे लड़का था। लेकिन किसी ने उसे बचाने के लिए ट्राई ही नहीं किया। उस भयावह पल को याद करते हुए राजकुमार मेहता बताते हैं कि उनका बेटा लगातार अपने बचाव के लिए कॉल कर रहा था, हेल्प के लिए चिल्ला रहा था, अपनी लोकेशन इंडिकेट करने के लिए वो मोबाइल का टॉर्च लाइट ऑन किया हुआ था, लेकिन किसी से कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि दो से तीन के बीच में तो मेरा बेटा डूब चुका था वहां से लाइट आना बंद हो गया था। छह बजे सुबह एसडीआरएफ वाले लोग बोट लेकर भीतर गए तब बॉडी रिकवर की गई।
चश्मदीद का आरोप- नाव-सेफ्टी जैकेट सब था, लेकिन नहीं की बचाने की कोशिश
वहीं,घटना के चश्मदीद और पेशे से डिलीवरी बॉय मुनींद्र ने मौके की आंखोंदेखी बताई। उन्होंने कहा कि हादसा रात करीब 11 बजकर 45 मिनट के आसपास हुआ, जब कार और युवक एक साथ पानी में जा गिरे। कार गिरने के बाद युवक ने अपने पिता को फोन कर मदद मांगी। उसने कहा कि वह नाले में गिर चुका है, लेकिन उसे यह भी पता नहीं कि वह कहां है। चश्मदीद ने बताया कि युवक काफी देर तक जीवित था और बचाव की गुहार लगाता रहा।
मुनींद्र का कहना है कि पुलिस करीब 15 मिनट में ही मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन फायर ब्रिगेड की टीम लगभग 20 मिनट बाद आई। आरोप है कि फायर ब्रिगेड कर्मियों ने नाले में उतरने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि बेसमेंट की खुदाई के कारण अंदर लोहे के सरिये लगे हैं, पानी बेहद ठंडा है और भीतर जाना खतरनाक है। युवक करीब दो घंटे तक कार पर बैठा हुआ मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद के लिए संकेत देता रहा और लगातार बचाने की अपील करता रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौके पर नाव और सेफ्टी जैकेट मौजूद थीं, फिर भी बचाव अभियान शुरू नहीं किया गया।
चश्मदीद ने बताया कि इसके बाद उन्होंने खुद पहल करते हुए कपड़े उतारे, कमर में रस्सा बांधा और करीब 100 मीटर नाले के भीतर उतर गए। उनका कहना है कि वह कम से कम 50 मीटर अंदर तक गए और 30 से 40 मिनट तक तलाश करते रहे, लेकिन तब तक युवक की आवाज आनी बंद हो चुकी थी।
मामले में एफआईआर दर्ज
बता दें कि मामले में जिस जमीन पर हादसा हुआ, उसके मालिक दो बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ग्रेटर नोएडा के सहायक पुलिस आयुक्त हेमंत उपाध्याय ने एफआईआर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मृतक के पिता की शिकायत पर नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना) और 125 (जीवन को खतरे में डालने वाला कृत्य) के तहत प्लॉट के मालिक दो बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
इसके अलावा, युवराज मेहता के परिवार की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने न तो रिफ्लेक्टर लगाए थे और न ही सर्विस रोड के किनारे नालियों को ढका था। मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने कहा कि घने कोहरे के बीच सुरक्षा उपायों की कमी के कारण उनके बेटे की मौत हुई।
अब आगे क्या कर रही पुलिस
घटना और राहत बचाव अभियान के बारे में हेमंत उपाध्याय ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि युवराज को बचाने के लिए पुलिस ने हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन पानी की गहराई, अंधेरा और घना कोहरा होने के कारण बचाव कार्य मुश्किल हो गया। हेमंत उपाध्याय ने कहा कि हमें डर था कि अगर कोई उसे बचाने के लिए पानी में उतरता तो और भी जानमाल का नुकसान हो सकता था। हमारे लिए स्थिति और भी बदतर हो सकती थी। वहीं, नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सर्वेश कुमार ने कहा कि जांच के दौरान पाई गई किसी भी लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी और जहां जरूरी होगा, कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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