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ग्वालियर साइबर क्राइम पुलिस को बड़ी सफलता; एयरफोर्स के रिटायर्ड रेडियोलॉजिस्ट से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरफ्तार

ग्वालियर साइबर क्राइम पुलिस ने 2.52 करोड़ रुपये की डिजिटल ठगी के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। इस मामले में एयरफोर्स के रिटायर्ड डॉ. नारायण महादेव को ठगने वाले गिरोह के तीन और सदस्यों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। गिरोह ने फर्जी बैंक खातों और म्यूल अकाउंट्स के जरिए रकम को कई राज्यों में ट्रांसफर किया था।

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ग्वालियर साइबर क्राइम पुलिस ने 2.52 करोड़ रुपये की डिजिटल धोखाधड़ी का पर्दाफाश

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Gwalior News: ग्वालियर साइबर क्राइम पुलिस ने 2.52 करोड़ रुपये की डिजिटल ठगी के मामले में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस केस में एयरफोर्स के रिटायर्ड रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नारायण महादेव को सीबीआई अधिकारी बनकर ठगने वाले गिरोह के तीन और सदस्यों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है।

इस मामले में अब तक कुल सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस तीनों आरोपियों को दिल्ली से ग्वालियर लेकर पहुंची है, जहां शुक्रवार को उन्हें कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड लिया जाएगा। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि ठगी की राशि पहले पांच अलग-अलग खातों में डाली गई, जिसके बाद इसे देश के करीब 15 राज्यों के 300 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इन राज्यों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, असम और कर्नाटक समेत कई अन्य इलाके शामिल हैं।

क्या-क्या हुआ बरामद?

पुलिस की जांच में पता चला कि 28 लाख रुपये इंडसइंड बैंक के एक खाते में जमा कराए गए थे। तकनीकी जांच के आधार पर दिल्ली पहुंची टीम ने तीन आरोपियों को दबोच लिया। उनके पास से छह पासबुक और चेकबुक, एटीएम कार्ड समेत मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे फर्जी बैंक खाते खुलवाने का काम करते थे।

टेलीग्राम के जरिए संचालित होता था नेटवर्क

आरोपी इन बैंक खातों को “म्यूल अकाउंट” के तौर पर गिरोह को बेच देते थे और पूरा नेटवर्क टेलीग्राम के जरिए संचालित किया जाता था। जानकारी के अनुसार, एयरफोर्स से रिटायर्ड 90 वर्षीय डॉ. नारायण महादेव से ठगी गई रकम सबसे पहले दिल्ली, नोएडा, आंध्र प्रदेश के गुंटूर और वाराणसी स्थित पांच अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इनमें से आंध्र प्रदेश के दो खातों में करीब 1.5 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश के तीन खातों में लगभग 1 करोड़ रुपये पहुंचाए गए।

तीनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं

पुलिस ने पकड़े गए तीनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं का खुलासा किया है। जानकारी के मुताबिक, 27 वर्षीय हरीश गढ़वाल, जो छिंदवाड़ा का निवासी है और नई दिल्ली में किराए के मकान में रह रहा था, उसने बैंक खाते खुलवाए और उन्हें ऑपरेट किया। हरीश टेलीग्राम के माध्यम से साइबर फ्रॉड के लिए बैंक खाते बेचने और खरीदने वाले गिरोह से जुड़ा हुआ था। 23 वर्षीय सौरव यादव के खाते में 28 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। सौरव का अपना इंडसइंड बैंक खाता है, जबकि 20 वर्षीय शरद डेहरिया सौरव के साथ जॉइंट अकाउंट को ऑपरेट कर रहा था।

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Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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