नोएडा में कई एंबुलेंस पाई गईं अनफिट (सांकेतिक फोटो)
Noida News: एंबुलेंस का काम मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाना होता है। लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर ऐसी एंबुलेंस दौड़ रही हैं, जो मरीजों को यमराज के दर्शन करा सकती हैं। दरअसल कई प्राइवेट हॉस्पिटलों में एंबुलेंस को बिना फिटनेस जांच के इस्तेमाल किया जा रहा हैं। ये सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं है, बल्कि इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज की जान भी खतरें में पड़ सकती है। इस लापरवाही को देखते हुए परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल पंजीकृत एंबुलेंस की संख्या 670 हैं, जिनमें से 24 एंबुलेंस की फिटनेस खत्म हो चुकी है। ये सभी एंबुलेंस निजी अस्पतालों की हैं। जिनकी जांच नहीं कराई गई है, जबकि विभाग ने पहले ही नोटिस भेजकर इनकी जांच कराने को कहा था। फिटनेस वैधता समाप्त होने के बावजूद इन्हें सड़कों पर चलाया जा रहा है। परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम ने जिले में अलग-अलग स्थानों पर जांच अभियानों को चलाया। इस दौरान पता चला कि कई एंबुलेंस चालक फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं दिखा सके। एआरटीओ प्रशासन डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि सभी एंबुलेंस मालिकों को नोटिस भेजा जा चुका है। अगर अब भी फिटनेस जांच नहीं कराई गई तो एंबुलेंस जब्त कर ली जाएंगी और चालान की कार्रवाई की जाएगी।
नियमों के अनुसार नई एंबुलेंस की फिटनेस जांच हर दो साल में करानी जरूरी है और 8 साल के बाद हर साल जांच अनिवार्य है। फिटनेस जांच यह सुनिश्चित करती है कि एंबुलेंस सड़क पर सुरक्षित रूप से चल सकती है और उसमें लगे उपकरण सही तरीके से काम कर रहे हैं। इसमें ब्रेक, स्टेयरिंग और अन्य जरूरी हिस्सों की जांच की जाती है ताकि मरीजों को समय पर और सुरक्षित इलाज मिल सके। अगर एंबुलेंस रास्ते में खराब होगी तो मरीज को हॉस्पिटल पहुंचाने में देरी हो सकती है, जिससे उसकी जान को खतरा हो सकता है। अब परिवहन विभाग अभियान चलाकर इन अनफिट एंबुलेंसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है, ताकि मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके।
जिले में निजी अस्पताल की 24 एंबुलेंस जांच में अनफिट पाई गई है। अच्छी बात ये है कि सरकारी अस्पतालों की सभी एंबुलेंस फिट और सुरक्षित हैं। परिवहन विभाग के अनुसार सरकारी अस्पतालों की एंबुलेंस अनफिट की लिस्ट में शामिल नहीं हैं। एआरटीओ प्रशासन डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच परिवहन विभाग परिसर में की जाती है। जिसमें दो से तीन घंटे का समय लगता है।
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