ग्रेटर नोएडा

ये एंबुलेंस अस्पताल नहीं, यमराज के पास पहुंचाएंगी! नोएडा में सड़कों पर दौड़ रही 'अनफिट एंबुलेंस'

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निजी अस्पतालों की 24 एंबुलेंस जांच में अनफिट पाई गई हैं। एंबुलेंस की फिटनेस जांच हर 2 साल में करानी होती है। लेकिन इन एंबलुेंस की जांच नहीं कराई गई। इसको लेकर परिवहन विभाग ने नोटिस भेजे हैं, लेकिन फिर भी जांच नहीं हुई। इस लापरवाही के खिलाफ अब विभाग सख्त कार्रवाई की तैयारी में है ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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नोएडा में कई एंबुलेंस पाई गईं अनफिट (सांकेतिक फोटो)

Noida News: एंबुलेंस का काम मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाना होता है। लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर ऐसी एंबुलेंस दौड़ रही हैं, जो मरीजों को यमराज के दर्शन करा सकती हैं। दरअसल कई प्राइवेट हॉस्पिटलों में एंबुलेंस को बिना फिटनेस जांच के इस्तेमाल किया जा रहा हैं। ये सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं है, बल्कि इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज की जान भी खतरें में पड़ सकती है। इस लापरवाही को देखते हुए परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

निजी अस्पताल की 24 एंबुलेंस अनफिट

परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल पंजीकृत एंबुलेंस की संख्या 670 हैं, जिनमें से 24 एंबुलेंस की फिटनेस खत्म हो चुकी है। ये सभी एंबुलेंस निजी अस्पतालों की हैं। जिनकी जांच नहीं कराई गई है, जबकि विभाग ने पहले ही नोटिस भेजकर इनकी जांच कराने को कहा था। फिटनेस वैधता समाप्त होने के बावजूद इन्हें सड़कों पर चलाया जा रहा है। परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम ने जिले में अलग-अलग स्थानों पर जांच अभियानों को चलाया। इस दौरान पता चला कि कई एंबुलेंस चालक फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं दिखा सके। एआरटीओ प्रशासन डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि सभी एंबुलेंस मालिकों को नोटिस भेजा जा चुका है। अगर अब भी फिटनेस जांच नहीं कराई गई तो एंबुलेंस जब्त कर ली जाएंगी और चालान की कार्रवाई की जाएगी।

एंबुलेंस की फिटनेस जांच क्यों जरूरी है?

नियमों के अनुसार नई एंबुलेंस की फिटनेस जांच हर दो साल में करानी जरूरी है और 8 साल के बाद हर साल जांच अनिवार्य है। फिटनेस जांच यह सुनिश्चित करती है कि एंबुलेंस सड़क पर सुरक्षित रूप से चल सकती है और उसमें लगे उपकरण सही तरीके से काम कर रहे हैं। इसमें ब्रेक, स्टेयरिंग और अन्य जरूरी हिस्सों की जांच की जाती है ताकि मरीजों को समय पर और सुरक्षित इलाज मिल सके। अगर एंबुलेंस रास्ते में खराब होगी तो मरीज को हॉस्पिटल पहुंचाने में देरी हो सकती है, जिससे उसकी जान को खतरा हो सकता है। अब परिवहन विभाग अभियान चलाकर इन अनफिट एंबुलेंसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है, ताकि मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके।

नोएडा में सरकारी एंबुलेंस की स्थिति

जिले में निजी अस्पताल की 24 एंबुलेंस जांच में अनफिट पाई गई है। अच्छी बात ये है कि सरकारी अस्पतालों की सभी एंबुलेंस फिट और सुरक्षित हैं। परिवहन विभाग के अनुसार सरकारी अस्पतालों की एंबुलेंस अनफिट की लिस्ट में शामिल नहीं हैं। एआरटीओ प्रशासन डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच परिवहन विभाग परिसर में की जाती है। जिसमें दो से तीन घंटे का समय लगता है।

जिले की एंबुलेंस की स्थिति

  • कुल पंजीकृत एंबुलेंस: 670
  • अनफिट एंबुलेंस: 24
Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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