Greater Noida: यमुना प्राधिकरण एरिया के गोल्फ कंट्री प्रोजेक्ट का निर्माण करने वाली सुपरटेक टाउनशिप प्राइवेट लिमीटेड की दिवालिया प्रक्रिया पर एनसीएलएटी ने रोक लगा दिया है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद इस प्रोजेक्ट में फंसे हुए करीब 3200 आवंटियों के घर का सपना साकार होने की आस है। दूसरी तरफ यमुना प्राधिकरण के भी 677 करोड़ रुपये बकाया भुगतान की उम्मीद फिर से जग गई है। इसे लेकर पंजाब और और सिंध बैंक की तरफ से दायर की गई अपील पर 12 जुलाई 2024 को एनसीएलटी ने दीवालिया प्रक्रिया शुरू कर अंतरिम समाधान (आईआरपी) को नियुक्त किया था।
3200 आवंटियों का सपना होगा साकरा
दरअसल, हुआ ये था कि एनसीएलएटी के दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के आदेश से करीब 3200 आवंटियों का सपना अधर में डूबता हुआ नजर आ रहा था। यमुना एक्सप्रेस-वे के सेक्टर 22-डी के प्लॉट नंबर टीएस 5 के प्रोजेक्ट, गोल्फ कंट्री पर बैंक ने 18 मार्च 2013 को 140 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत किया था।
7 दिन में बैंक को भुगतान देने का प्रस्ताव
इस आदेश के जारी किए जाने के बाद सुपरटेक ने इसके खिलाफ एनसीएलएटी में अपील की और सात दिन में बैंक को भुगतान का प्रस्ताव देने की दलील दी थी। जानकारी के अनुसार इसमें होम बायर्स का सपोर्ट भी सुपरटेक के साथ है। एसनीएलएटी ने इस आदेश की अपील को स्वीकार करते हुए अगस्त की 21 तारीख नियत की है।
सुपरटेक पर 677.79 करोड़ बकाया
इस प्रोजेक्ट के तहत ग्रुप हाउसिंग के डेवलप करने का प्रस्ताव था। वहीं यीडा ने सुपरटेक की इस परियोजना के लिए 2011 में करीब 100 एकड़ का प्लॉट आवंटन किया था। वहीं सुपरटेक पर प्राधिकरण के 677.79 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके लिए अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों का लाभ देकर बिल्डर को 25% के रूप में 137.28 करोड़ रुपये अभी चुकाने हैं ।
बकाया हुआ 216 करोड़ 90 लाख 87 हजार
पिछले साल 30 जून 2023 तक बैंक का बकाया बढ़कर 216 करोड़ 90 लाख 87 हजार रुपये हो गए हैं। इस मामले में कंपनी को बैंक की तरफ से कई बार नोटिस भी जारी किए गए। सेक्टर 22-डी में कुछ टावर तैयार हैं, जिनमें बने फ्लैट में लोग रह रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि प्राधिकरण ने सुपरटेक को टाउनशिप को 4750 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से प्लॉट का आवंटन किया था।
जमीन आवंटन की रद्द करने की सिफारिश
वहीं यीडा ने 26 जू 2024 को बोर्ड मीटिंग में सुपरटेक के जमीन आवंटन की रद्द करने की सिफारिश भी की थी। लेकिन, मामला कोर्ट में जाने के कारण यह कार्रवाई नहीं हो पाई थी। इस मामले में पंजाब सिंध बैंक की तरफ से एनसीएलटी में बताया गया था कि सुपरटेक की इस कंपनी का 18 मार्च 2013 को 140 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत किया था। इस लोन की किस्त कंपनी ने द्वार नहीं चुकाई गई है।
