Best Places to Visit in Greater Noida: प्रेम की बात करें तो ग्रेटर नोएडा के कासना के सती निहालदे का भी नाम सामने आता है। इतिहास में कई प्रेम कहानियों को तरजीह दी जाती है। यह कहानियां किसी न किसी रूप से किसी विशेष क्षेत्र से जुड़ी हुई होती हैं। ग्रेटर नोएडा के कासना का सती निहालदे मंदिर भी प्रेम की कहानी के लिए प्रख्यात है। यह मंदिर प्रेम की इबादत बयां करती एक अनोखी इमारत है। राजस्थान के कीचकगढ़ के राजकुमार ने अपने पत्नी निहालदे की मौत के बाद यहां कासना में मंदिर बनवाया था। नए साल पर ऐतिहासिक धरोहर पर घूमने का यह सही विकल्प हो सकता है।
बता दें कि कासना गांव में आज भी सती निहालदे का मंदिर मौजूद है। यह कभी राजा मघ की राजधानी हुआ करती थी। कासना के लोगों की मानें तो कभी इस क्षेत्र में ‘नौलखा बाग’ था। जिसमें 9 लाख पेड़ लगे थे। साथ ही यह क्षेत्र हजारों बीघा जमीन में फैला हुआ था। राजा मघ की बेटी राजकुमारी निहालदे अपनी सखियों के साथ इसी बाग में झूला झूलती थीं। कासना गांव के लोगों के अनुसार, राजस्थान के कीचकगढ़ का राजकुमार नरसुल्तान केशवगढ़ के राजकुमार फूल कंवर के साथ शिकार खेलता हुआ कासना गांव आ पहुंचा था। यहां दोनों विश्राम करने के लिए रुक गए। नरसुल्तान ने यहीं पर पहली बार निहालदे को देखा तो वह उनपर मोहित हो गया।
राजकुमार नरसुल्तान को मिला था वनवास
कासना गांव के लोग बताते हैं कि नरसुल्तान ने निहालदे के पिता राजा मघ के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा और वे मान गए थे। दोनों का विवाह करा दिया गया। शादी के बाद नरसुल्तान रानी को लेकर कीचकगढ़ पहुंचा। लेकिन नरसुल्तान के पिता ने उन्हें अपने राज्य से ही बाहर निकाल दिया। बाद में नरसुल्तान को पत्नी निहालदे के साथ केशवगढ़ में रहना पड़ा। उधर, फूलकंवर के मन में निहालदे को पाने का लालच आने लगा। लिहाजा उसने नरसुल्तान को मारने की साजिश की, लेकिन नरसुल्तान किसी तरह बच गया। केशवगढ़ के राजा ने अपने बेटे का पक्ष लेते हुए नरसुल्तान को वनवास भेजने का हुक्म दे दिया।
वनवास से लौटने में हुई राजकुमार को देर
बता दें कि निहालदे राजकुमार के साथ वनवास पर जाने के लिए जिद करने लगी थी। लेकिन नरसुल्तान ने उसे साथ लेने जाने से इंकार कर दिया। नरसुल्तान ने पत्नी निहालदे से सावन माह में तीज पर वापस आने का वादा किया। निहालदे अपने पति के वियोग में जीवन बिताने लगी। एक दिन वह अपने पिता के घर कासना वापस लौट आई। उधर, नरसुल्तान राजस्थान के नरवरगढ़ के मारू के यहां निवास करने लगे। हालांकि, उसने मारू को अपने बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। एक दिन निहालदे का भेजा पत्र मारू के हाथ लग गया। तब उसे पूरे मामले की जानकारी हो गई। निहालदे ने पत्र में लिखा था कि नरसुल्तान तीज के दिन कासना नहीं पहुंचा तो वह सती हो जाएगी। तीज के दिन नरसुल्तान को कासना आने में कुछ देर हो गई। नरसुल्तान के समय पर नहीं पहुंचने से निहालदे सती हो गई। राजकुमार नरसुल्तान ने सती स्थल पर ही पत्नी निहालदे का मंदिर बनवा दिया। ग्रेटर नोएडा के कासना गांव के लोगों के बीच यह प्रेम कहानी आज भी प्रचलित है। प्यार, त्याग और विरह का यह प्रतीक आपको बेहद पसंद आएगा।
