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Greater Noida: लापरवाही की भेंट चढ़ा 5 साल का मासूम, पानी से भरे प्लॉट में गिरने से मौत; 3 महीने में तीसरी बड़ी घटना

ग्रेटर नोएडा के बादलपुर क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है, जहां लापरवाही ने एक हंसते-खेलते मासूम की जान ले ली। नर्सरी में पढ़ने वाला 5 साल का बच्चा अपने घर के पास खेलते समय पानी से भरे एक गहरे प्लॉट में जा गिरा, जिससे उसकी मौत हो गई।

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3 फीट गहरे पानी में डूबने से मासूम की जान गई (सांकेतिक चित्र | iStock)

Photo : iStock

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा के छपरौला गांव की गलियों में बुधवार की दोपहर रोज की तरह सामान्य थी। 5 साल का एक मासूम, जो अभी नर्सरी का छात्र था, अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। लेकिन उसे क्या पता था कि घर के ठीक पास मौजूद एक खुला और पानी से भरा प्लॉट उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा। खेलते-खेलते वह अचानक तीन फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरा।

चीख-पुकार और नाकाम कोशिशें

जैसे ही बच्चा पानी में गिरा, साथ खेल रहे अन्य बच्चों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर पड़ोसी और घर के अंदर काम कर रही मां बाहर दौड़ीं। स्थानीय लोगों ने रस्सी के सहारे बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिस को भी सूचित किया। आनन-फानन में मासूम को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

गांव की गंदगी और प्रशासन की अनदेखी

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह कड़वा सच सामने आया है कि जिस प्लॉट में बच्चा गिरा, वहां लंबे समय से गांव का कचरा और पानी जमा हो रहा था। यह असुरक्षित इलाका सड़क के किनारे करीब एक किलोमीटर तक फैला हुआ है, लेकिन यहां न तो कोई बैरिकेडिंग की गई थी और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम थे। हालांकि, दादरी के SDM अनुज नेहरा का कहना है कि यह पानी बुधवार को हुई बारिश के कारण जमा हुआ था, लेकिन प्लॉट के स्वामित्व और जलभराव के स्थायी कारणों पर फिलहाल चुप्पी साधी गई है।

3 महीने, 3 मौतें: आखिर कब जागेगा प्रशासन?

ग्रेटर नोएडा में पानी से भरे प्लॉट और गड्ढों के कारण जान जाने का यह तीसरा मामला है। बीते 15 फरवरी को दनकौर में एक 3 साल के मासूम की इसी तरह डूबने से मौत हुई। उसके पहले 18 जनवरी को सेक्टर 150 में एक 27 वर्षीय इंजीनियर की कार पानी से भरे प्लॉट में गिरने से उसकी जान चली गई। जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है, लेकिन क्या मुआवजे से उस मासूम की कमी पूरी हो पाएगी? गांव के लोग अब प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर इन खुले और खतरनाक प्लॉटों को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी किसकी है?

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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