गाजियाबाद

Ghaziabad: 'चंद्रा' को मिली कोर्ट से जमानत, जेल से 'बाबू' हो गया रिहा, शातिर चोरों ने चली गजब की चाल

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 17, 2023, 02:18 PM IST

Ghaziabad News: गाजियाबाद जेल में दो आरोपियों द्वारा धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। चोरी के आरोप में दो आरोपी जेल में बंद थे। ये दोनों आरोपी अपने नाम एक दूसरे से बदलकर जेल में रहे और जब एक आरोपी को जमानत मिली तो उसकी जगह पर दूसरा आरोपी जेल से बाहर आ गया। पूरे मामले का खुलासा दूसरे दिन कोर्ट में पेशी के दौरान हुआ।

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नाम बदलकर जेल प्रशासन से धोखधड़ी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

KEY HIGHLIGHTS
  • ट्रांसफार्मर चोरी के आरोप में जेल गए थे दोनों आरोपी
  • आरोपियों ने जेल के रिकार्ड में लिखवाया था गलत नाम
  • कोर्ट में पेशी के दौरान हुआ धोखाधड़ी का खुलासा

Ghaziabad News: गाजियाबाद में जेल प्रशासन की बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई है। चोरी के आरोप में जेल में बंद एक अरोपी फिल्‍मी स्‍टाइल में अपने साथी की जमानत पर जेल से बाहर निकल आया। बताया जा रहा है कि दोनों चोरी के आरोप में एक साथ जेल पहुंचे थे और यहां पर नाम बदलकर जेल से जुड़े सुरक्षा कर्मियों को गुमराह किया। जिसकी वजह से कोर्ट ने जब एक आरोपी को जमानत दी तो उसकी जगह पर दूसरा आरोपी जेल से बाहर आ गया। हालांकि अगले ही दिन इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश हो गया। इसके बाद पुलिस ने दोनों को फिर से जेल भेज दिया। इस संबंध में जेल प्रशासन द्वारा मसूरी थाना में गढ़मुक्तेश्वर के रहने वाले आरोपी तारा चंद्र और बाबू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

इस घटना की जानकारी देते हुए जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि सिंभावली थाना पुलिस ने आरोपी तारा चंद्रा और बाबू को ट्रांसफार्मर चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इन दोनों को बीते साल 17 दिसंबर को जेल लाया गया था। जेल में पहुंचने पर तारा ने अपना नाम बाबू और बाबू ने अपना नाम तारा बताया था। जेल अधीक्षक ने बताया कि, जेल में जब किसी आरोपी को लाया जाता है, तो उस समय सिर्फ न्यायालय का वारंट होता है। आरोपित के पास किसी तरह का पहचान-पत्र नहीं होता है। आरोपितों द्वारा दी जाने वाली जानकारी को ही रिकार्ड में दर्ज किया जाता है।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

जेल प्रशासन के अनुसार, कोर्ट ने बाबू नाम के आरोपी को जमानत दी थी। यह आदेश जब जेल पहुंचा तो बाबू की जगह तारा चंद्रा रिहा हो गया, क्‍योंकि जेल रिकार्ड के अनुसार तारा ही बाबू था। अगले दिन जब जमानत के लिए दूसरे आरोपी की कोर्ट में पेशी हुई तो उसने वहां पर खुद को बाबू (असली नाम) बताया। इसके बाद इस धोखाधड़ी की जानकारी जेल प्रशासन को हुई और इस मामले से कोर्ट को भी अवगत कराया गया। जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर बाबू और तारा दोनों को दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस मामले में जेल प्रशासन की भी चूक बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, दाखिल करते समय आरोपी भले ही झूठ बोलकर अपना नाम बदल लें, लेकिन जब कोर्ट की तरफ से जमानत का आदेश दिया जाता है तो उसके साथ आरोपी का पहचान पत्र भी भेजा जाता है। जेल अधिकारियों ने बाबू के पहचान पत्र के साथ तारा का मिलान नहीं किया।
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