मुरादाबाद में टीचर ने की आत्महत्या
Moradabad News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक बड़ी खबर सामने आई है। जिले के भगतपुर थाना क्षेत्र के जाहिदपुर सिकंदरपुर कंपोजिट स्कूल में कार्यरत सहायक अध्यापक सर्वेश सिंह ने आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि इस समय वह बीएलओ (BLO) ड्यूटी भी निभा रहे थे। आत्महत्या से पहले, सर्वेश सिंह ने दो पेज का एक सुसाइड नोट लिखा, जिसे उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी के नाम संबोधित किया।
इस पत्र में उन्होंने अपनी आत्महत्या का कारण SIR (Special Intensive Revision) गणना पत्रक का टारगेट पूर्ण न होना और अत्यधिक कार्यभार बताया। यह हृदय विदारक घटना सामने आने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। बता दें कि बीते दिनों भी SIR काम के दबाव के चलते कुछ अन्य महिला शिक्षकों ने भी इस्तीफा दिया था। बीते कुछ दिनों से लगातार SIR के काम के शिक्षकों पर दबाव से संबंधित कई मामले सामने आ रहे हैं।
सर्वेश सिंह द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी को संबोधित अपने सुसाइड नोट में उन्होंने अपने दर्द और परेशानियों को विस्तार से व्यक्त किया। लेटर में उन्होंने लिखा कि 14-15 वर्षों की सेवा के बाद पहली बार 7 अक्टूबर को बीएलओ बूथ संख्या 406 पर नियुक्त किया गया था और उन्हें इस काम की पूरी जानकारी नहीं थी, जिसके कारण वह समय पर अपना टारगेट पूरा नहीं कर पा रहे थे।
उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा "प्रार्थी रात दिन भर कड़ी मेहनत करने के बाद रात को मात्र 2 से 3 घंटे भी नही सो पा रहा हूं।" उन्होंने अपनी चार छोटी बेटियों, जिनमें से दो की तबीयत कई दिनों से खराब थी, उनका भी जिक्र किया और बताया कि वह अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। पत्र में उन्होंने आत्महत्या की पूरी जिम्मेदारी खुद पर लेते हुए परिवार को निर्दोष बताया और अपने विद्यालय के बच्चों को प्यार देने का अनुरोध करते हुए माफी मांगी।
बेहतर काम के बावजूद क्यों उठाया यह कदम?
सर्वेश सिंह की आत्महत्या की सूचना मिलते ही पुलिस ने उनके शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी करने के लिए भेज दिया है। इस मामले के बाद से जिला प्रशासन ने हड़कंप मच गया और इस बीच DM अनुज कुमार सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सर्वेश सिंह का काम बेहतर था और वह बूथ संख्या 406 पर तैनात थे। डीएम ने सवाल उठाया कि आखिर क्या कारण रहा कि उन्होंने ऐसा आत्मघाती कदम उठाया।
डीएम ने पुलिस के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी जांच के आदेश दिए हैं ताकि इस दुखद घटना के पीछे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। परिजनों ने भी लगातार सर्वे और रिपोर्टिंग के बोझ को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाला मुख्य कारण बताया है। यह घटना शिक्षा विभाग के शिक्षकों पर चुनाव संबंधी अत्यधिक कार्यभार के गंभीर मुद्दे को उजागर करती है।