Ghaziabad: गाजियाबाद विकास प्राधिकरण अब अपने काम को पूरी तरह से ऑनलाइन करने जा रही है। इसके लिए जीडिए की सभी विभागों के काम को पेपरलेस करने की तैयारी की जा रही है। जिससे के इस साल पूरी तरह प्राधिकरण पेपरलेस हो सके और सभी कामों को ऑनलाइन किया जा सकें। प्राधिकरण के सभी कामों के ऑनलाइन हो जाने से इसका फायदा आवंटियों और शिकायतकर्ताओं को भी होगा। आपको बता दें कि विभाग में 20 से ज्यादा आवासीय और व्यावसायिक योजनाएं हैं। इन सभी की डिटेल्स फाइलों में हैं। अब इन फाइलों की सभी डेटा को ऑनलाइन किया जाएगा, जिससे कि व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक बनाया जा सके। इससे फाइलों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। अभी किसी भी संबंध में जानकारी लेने के लिए बाबू को बुलाना पड़ता है। उसके नहीं रहने पर काम में देरी होती है और काम बढ़ता जाता है।
जल्द सभी काम होंगे ऑनलाइन
जानकारी के अनुसार जजीडीए की 20 से अधिक आवासीय और व्यावसायिक योजनाएं हैं। और इन योजनाओं में करीब डेढ़ लाख से ज्यादा आवंटी है। इन सभी के भूखंड, फ्लैट आदि का डेटा प्राधिकरण की फाइलों में है। साथ ही अन्य कार्यों के लिए भी प्राधिकरण में फाइलों को अपडेट कर तैयार किया जाता है। लेकिन, अब इस व्यवस्था को आधुनिक बनाने की प्लानिंग की जा रही है। जिसके तहत तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इसके लिए सभी डेटा को ऑनलाइन किया जा रहा है। इन सभी फाइलों की डेटा के ऑनलाइन हो जाने से अधिकारियों को उनके सिस्टम पर ही आवंटियों की पूरी जानकारी ऑनलाइन मिल सकेगी।
जुलाई के दूसरे हफ्ते से काम होगा शुरू
इस बारे में जीडीए अधिकारी बताते हैं कि इन कामों को ऑनलाइन करने की शुरुआत जुलाई के दूसरे हफ्ते से होगी। अब सभी काम ऑनलाइन किए जाएंगे। इसके अलावा जो पहले की फाइलें हैं, उन्हें भी ऑनलाइन अपडेट किया जाएगा। जिससे कि प्राधिकरण को पूरी तरह से पूरी तरह पेपरलेस किया जाएगा। यह व्यवस्था प्राधिकरण के सभी विभागों में जाएगी। इसमें मुख्य रूप से संपत्ति अनुभाग, नियोजन, उद्यान, इंजीनियरिंग, विधि समेत अन्य विभाग हैं। जीडिए सचिव राकेश कुमार सिहं का कहना है कि प्राधिकरण के कामकाज GG के वर्तमान में भी काफी काम ऑनलाइन हैं, लेकिन जो बचे हुए हैं उन्हें भी पेपरले करने की योजना है।
अभी आती है कई तरह की दिक्कतें
अभी सभी फाइलें बाबुओं के पास होती हैं। अगर किसी भी फाइल से संबंधित जानकारी चाहिए हो तो बाबू को फाइल के साथ बुलाना पड़ता है। ऐसे में अगर बाबू के छुट्टी पर होने से काम में देरी होती है। आलमारी की चाबी बाबुओं के होती है। जब वह छुट्टी से लौटता है, तो जाकर इस फाइल से जुड़ी जानकारी मिल पाती है और काम को आगे बढ़ाया जाता है। इस तरह के कई मामले जीडीए उपाध्यक्ष के सामने भी आए हैं।
