Ghaziabad News: गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की 166वीं बोर्ड बैठक में इंदिरापुरम योजना को नगर निगम को सौंपा गया। अब इसके विकास कार्य को गति मिलने वाली है। इंदिरापुरम योजना में विकास और अन्य कार्य गाजियाबाद नगर निगम द्वारा किए जाएंगे। 6 सितंबर को इंदिरापुरम हैंडओवर को लेकर गाजियाबाद प्राधिकरण और नगर निगम के बीच एमओयू साइन किया गया। इसके साथ ही जीडीए द्वारा निगम को हैंडओवर के एवज में 185 करोड़ रुपये की का भुगतान करना है। ये राशि 4 किस्तों में दी जाएगी, जिसकी पहली किस्त का भुगतान जीडीए द्वारा 3 अक्टूबर को किया गया। इससे यहां के निवासियों को भी लाभ होगा।
सरकारी योजनाओं होगा लाभ
इंदिरापुरम योजना के हैंडओवर से पहले निगम द्वारा इस क्षेत्र में सरकारी फंड का एक पैसा खर्च नहीं किया जाता था। न ही यहां के लोगों को किसी भी सरकारी योजना का लाभ मिलता था। लेकिन हैंडओवर प्रक्रिया के बाद अब इंदिरापुरम योजना के निवासियों को सरकारी योजनाओं का भी पूरा लाभ मिलेगा। साथ ही इंदिरापुरम के विकास को भी गति मिलेगी।
जीडीए ने किया पहली किस्त का भुगतान
जानकारी के अनुसार, हैंडओवर प्रक्रिया के बाद जीडीए द्वारा नगर निगम को चार किस्तों में 185 करोड़ की राशि दी जाएगी। पहली किस्त एकमुश्त 70 करोड़ की राशी का भुगतान 3 अक्टूबर को कर दिया गया है। अब दूसरी किस्त 40 करोड़ रुपये 31 दिसंबर 2024 तक दी जाएगी। तीसरी किस्त 40 करोड़ रुपये 31 मार्च 2025 और चौथी किस्त 35 करोड़ 1 जुलाई 2025 को दी जाएगी।
विकास को मिलेगी गति
नगर निगम को इंदिरापुरम योजना के लिए पहली किस्त मिलने के बाद विकास के कार्य को गति मिलेगी। पहली किस्त मिलने के बाद इंदिरापुरम के पार्षदों के साथ नगर निगम ने बैठक की, जिसमें क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर चर्चा की गई। इसमें सड़कों के विकास से लेकर पार्कों और अन्य कार्यों को तेजी से पूरा किए जाने पर चर्चा की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 से 20 दिन के भीतर सभी कार्यों को शुरू किया जाएगा।
185 करोड़ रुपये से होगा ये विकास
जानकारी के अनुसार, जीडीए द्वारा दिए जाने वाले 185 करोड़ रुपये में से 50 करोड़ रुपये सड़कों के विकास, 50 करोड़ रुपये नालों के निर्माण के लिए दिए जा रहे हैं। 25 करोड़ रुपये सीवर के लिए और 20 करोड़ रुपये पीने के पानी के लिए हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 15 करोड़ रुपये और 13.69 करोड़ रुपये स्ट्रीट लाइट के लिए ताकि रास्तों पर अंधेरा न हो और लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। 11 करोड़ रुपये पार्कों आदि के लिए है।
नगर निगम को मिला टैक्स का अधिकार
जीडीए की इंदिरापुरम योजना 1200 एकड़ की भूमि पर विकसित की गई है। हैंडओवर होने के बाद निगम को अब निवासियों से प्रॉपर्टी टैक्स, वॉटर टैक्स, तथा सीवरेज और जल निकासी टैक्स वसूलने का अधिकार मिल गया है।
नगर निगम को क्यों सौंपा गया इंदिरापुरम
बता दें कि जीडीए का कार्य योजना का विकास करना है। लेकिन उसके रखरखाव का कार्य नगर निगम द्वारा किया जाता है। किसी योजना को विकसित घोषित करने के बाद उसे नगर-निगम को ट्रांसफर किया जाता है। लेकिन इंदिरापुरम योजना के मामले में ऐसा हो नहीं सका। 2009 में इंदिरापुरम योजना को विकसित घोषित किया गया था। लेकिन हैंडओवर की प्रक्रिया में कोई न कोई अड़चन आने के कारण अब ये प्रक्रिया पूरी की गई है।
