गाजियाबाद

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण बनाने जा रहा नई टाउनशिप, मेरठ-हापुड़ और दिल्ली तक होगा शहर का विस्तार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 8, 2023, 11:56 AM IST

GDA Set to expand Ghaziabad limits: उत्तर प्रदेश सरकार कैबिनेट से मिली मंजूरी के बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण शहर की सीमाओं का विस्तार करने की योजना बना रहा है। जीडीए लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर और डासना में नई टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण की योजना बना रहा है।

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गाजियाबाद विकास प्राधिकरण बनाएगा नई टाउनशिप

Photo : BCCL

GDA New Townships: अगर आप दिल्ली-एनसीआर में अपना घर लेने का सपना देख रहे हैं, तो आपका यह सपना जल्द ही पूरा हो सकता है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) नई टाउनशिप की योजना बना रहा है। इस टाउनशिप का विस्तार मेरठ, हापुड़ और दिल्ली तक होगा। जीडीए इस योजना के विस्तार के तैयारी कर रहा है।

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) और यूपी हाउसिंग बोर्ड इस टाउनशिप के लिए लिए भूमि अधिग्रहण और फंड प्राप्त करने की तैयारी में हैं। बता दें, हाल ही में यूपी सरकार ने शहर का विस्तार करने के लिए एक नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत जल्द ही राज्य सरकार 4,000 करोड़ रुपये जारी करेगी। अधिकारियों ने कहा कि जीडीए और हाउसिंग बोर्ड को जल्द ही फंड का एक बड़ा हिस्सा मिलने की उम्मीद है। इस फंड के मिलने के बाद शहर की सीमाओं का विस्तार करते हुए भूमि अधिग्रहण किया जाएगा।

इन जगहों पर होगा भूमि अधिग्रहण

जीडीए के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण शहर की सीमाओं का विस्तार करना आवश्यक हो गया है। ऐसे में जीडीए नई टाउनशिप के लिए लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर और डासना में भूमि अधिग्रहण की तैयारी में है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की सीमाओं में विस्तार होगा और जल्द ही इन इलाकों में जीडीएक की टाइउशिप बनाने का काम शुरू होगा।

बुधवार को कैबिनेट ने दी थी मंजूरी

बता दें, बीते बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने शहर की सीमाओं के विस्तार नीति को अपनी मंजूरी दी थी। इस नीति के तहत, विभिन्न जिलों में विकास प्राधिकरण नई टाउनशिप के लिए भूमि का अधिग्रहण करेंगे। इसके लिए करीब चार हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो विकास प्राधिकरणों के बीच आवंटित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त सरकार 20 वर्ष की अवधि के लिए भूमि अधिग्रहण लागत का 50% वहन करेगी। सरकार इस पर कोई ब्याज भी नहीं लेगी।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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