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Gaya: बिहार में एक और पुल पर मंडराया ढहने का खतरा! 64 करोड़ के केनी ब्रिज के पिलर हुए क्षतिग्रस्त, IIT पटना ने भी चेताया

Gaya News: बिहार में पुलों की सुरक्षा को लेकर हुए IIT पटना के स्ट्रक्चरल ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गया में फल्गु नदी पर बना 64 करोड़ का केनी पुल (Keni Bridge) ढहने के कगार पर है।

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जर्जर हालत में गया का केनी पुल

Photo : PTI

Gaya News: बिहार और पुल का गिरना, बीते कुछ सालों में यह ऐसी तस्वीर बनी है कि ये दोनों पर्याय ही समझे जाने लगे हैं। पिछले दिनों भागलपुर में प्रसिद्ध विक्रमशिला पुल का एक हिस्सा गिरने के बाद एक और पुल कतार में खड़ा दिखाई दे रहा है। खराब निर्माण कार्य, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी का ये खौफनाक नमूना गया जिले से सामने आया है। फल्गु नदी पर लगभग 64 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया 'केनी पुल' आज ढहने की कगार पर पहुंच चुका है। हाल ही में आईआईटी पटना (IIT Patna) की तकनीकी टीम द्वारा किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में सामने आया है कि 18 खंभों पर टिके इस विशाल पुल के 3 मुख्य पिलर पूरी तरह से डैमेज हो चुके हैं। सीमेंट और कंक्रीट का प्लास्टर पूरी तरह टूटकर गिर चुका है और पिलरों के अंदर से जंग लगी लोहे की रॉड (सरिया) बाहर झांक रही हैं, जिससे पुल का पूरा ढांचा बेहद कमजोर हो चुका है।

गया-पटना-नालंदा को जोड़ने वाली मुख्य लाइफलाइन संकट में

दरियापुर-गोला रोड पर स्थित यह केनी पुल कोई आम ग्रामीण पुल नहीं है, बल्कि यह गया को राजधानी पटना, राजगीर और नालंदा जैसे महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ने वाला एक बेहद अहम संपर्क मार्ग है। यह पुल विशेष रूप से अतरी और बेलागंज विधानसभा क्षेत्र के बीच आने-जाने वाले लाखों लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इस पुल के जर्जर होने से न सिर्फ यातायात ठप होने का खतरा है, बल्कि इन जिलों का आपस में संपर्क पूरी तरह कट जाने की कगार पर है।

हर दिन हजारों राहगीरों की जान दांव पर

IIT की टीम द्वारा इसे खतरनाक' घोषित किए जाने के बावजूद, इस पुल पर भारी वाहनों का आना-जाना बदस्तूर जारी है। स्थानीय ग्रामीणों और चालकों का आरोप है कि जब भी कोई भारी गाड़ी इस पुल के ऊपर से गुजरती है, तो पुल कांपने लगता है। इस व्यस्त मार्ग से रोजाना सैकड़ों स्कूल बसें, हजारों यात्री वाहन, भारी ट्रक और मालवाहक गाड़ियां गुजरती हैं। पुल की यह डरावनी स्थिति हर दिन हजारों बेकसूर लोगों की जिंदगी को सीधे मौत के मुंह में धकेल रही है।

सरकारी ऑडिट में खुली पोल: 9 पुलों की हालत चिंताजनक

भागलपुर में विक्रमशिला पुल का हिस्सा गिरने के बाद जागे पथ निर्माण विभाग ने जब बिहार स्टेट ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन और IIT के जरिए जांच शुरू कराई, तो पूरे सिस्टम की पोल खुल गई। ऑडिट के शुरुआती निष्कर्षों के मुताबिक, बिहार के अलग-अलग जिलों में 9 पुल ऐसे पाए गए हैं जिन्हें तत्काल रिपेयर और तत्काल मजबूतीकरण की जरूरत है। पीटीआई ने केनी पुल की तस्वीरें साझा की हैं, जो सरकार के 'सुशासन' और दावों पर तीखे सवाल उठा रही हैं। मानसून की दस्तक और फल्गु नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले अगर इस पुल को बंद करके इसकी युद्धस्तर पर मरम्मत नहीं की गई, तो यह पुल भी अगवानी-सुल्तानगंज पुल की तरह नदी में समा जाएगा।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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