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देश के इस शहर में सबसे पहले लगा था CCTV सर्विलांस सिस्टम

आज देशभर में पुलिस और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए सीसीटीवी बेहद अहम तकनीक बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में पहला सिटी-वाइड सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम किस शहर में लगाया गया था। उस समय प्रोजेक्ट में ANPR, फेस रिकग्निशन और ई-चालान जैसी तकनीक शामिल थीं, जिससे ट्रैफिक मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में बड़ी मदद मिली।

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यहां लगा देश का पहला सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम

चोरी की घटनाओं को रोकने की बात हो या किसी उलझे हुए केस को सुलझाना पुलिस आज सीसीटीवी पर काफी भरोसा करती है। यहां तक कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए भी सीसीटीवी की मदद ली जाती है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होने पर ट्रैफिक पुलिस सीसीटीवी जैसी टेक्नोलॉजी के जरिए ही गाड़ियों की पहचान करके उनके चालान भी काटती है। ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि सीसीटीवी की शुरुआत कहां से हुई? भारत में सबसे पहले सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम किस शहर में लगाया गया? चलिए जानते हैं -

आज भले ही हर बाजार, चौराहों, मेट्रो स्टेशनों और कॉलोनियों में हर तरफ कैमरों की कड़ी नजर रहती है। लेकिन बहुत कम ही लोग जानते हैं कि देश में पहला सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम किस शहर में लगा था। ट्रैफिक मॉनिटरिंग और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सबसे पहले सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम गुजरात के सूरत शहर में लगाया गया था। शहर में बढ़ती ट्रैफिक समस्या और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया था।

ANPR का सबसे पहले हुआ इस्तेमाल

जी हां, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और बेहतर सिक्योरिटी के लिए डिजाइन किए गए सिटी-वाइड सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम को देश में पहली बार सूरत शहर में ही लागू किया गया था। इस प्रोजेक्ट के तहत पूरे शहर में सीसीटीवी लगाए गए थे, जिसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और फेशियल रिकग्निशन जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी शामिल थी।

ट्रैफिक मैनेज करने के लिए हुई शुरुआत

दिसंबर 2014 में इसकी शुरुआत हुई और इस स्तर पर सर्विलांस कैमरा इंस्टॉल करने और उन्हें सेंट्रलाइज्ड कमांड और कंट्रोल सेंटर से जोड़ने वाला यह पहला प्रोजेक्ट था। इसके तहत शहर भर में हजारों कैमेरे लगाए गए। जिनमें शहर के मशहूर चौराहे, सार्वजनिक जगहें और एंट्री प्वाइंट शामिल थे। जैसा कि हमने पहले ही बताया इस सिस्टम में ANPR, ई-चालान और वीडियो एनालिटिक्स भी शामिल थे, ताकि ट्रैफिक को मैनेज किया जा सके और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोका जा सके।

इस सिस्टम के लगने से अब कंट्रोल रूम में बैठकर ही पुलिस सड़कों की स्थित पर नजर रख पा रही है। किसी भी चौराहे पर जाम लगने, दुर्घटना होने या नियम तोड़ने पर तुरंत कार्रवाई करना भी अब आसान हो गया।

सूरत का निक नेम क्या है?

सूरत के एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के बारे में तो जान लिया। क्या आप जानते हैं कि सूरत का निक नेम क्या है। जी हां, सूरत को डायमंड सिटी ऑफ इंडिया कहा जाता है। बता दें कि दुनियाभर के 90 फीसद से ज्यादा हीरों की कटाई और पॉलिश सूरत में ही होती है।

सूरत एक समय पर भारत की सबसे ज्यादा पर प्रति व्यक्ति आय वाला शहर रह चुका है। इसके अलावा, यह दुनिया के 5 सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में से भी रहा है। मध्य काल में सूरत मुगलों साम्राज्य का प्रमुख बंदरगाह था।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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