Haryana Rajya Sabha Elections 2026 : हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 16 मार्च को मतदान प्रक्रिय संपन्न होगी। लेकिन चर्चा है कि हरियाणा में एक निर्दलीय उम्मीदवार भी नामांकन भर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस का खेल खराब हो सकता है क्योंकि फिलहाल विधायकों की संख्या के मुताबिक बीजेपी और कांग्रेस के खाते में एक-एक सीट जाना तय माना जा रहा है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार इस समीकरण को बिगाड़ सकता है।
किरण चौधरी-रामचंद्र जांगड़ा का अप्रैल में खत्म होगा कार्यकाल
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को होगा। फिलहाल यह दोनों सीटें बीजेपी के पास हैं। बीजेपी के दोनों सांसदों किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है, जिसके चलते ये चुनाव हो रहे हैं। बीजेपी की तरफ से जहां किरण चौधरी का नाम इस रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। वहीं कुछ और नेता भी टिकट के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। हरियाणा में विधायकों का गणित साफ है। इस समय बीजेपी के पास 48 विधायक हैं तो वहीं कांग्रेस के पास 37 विधायक है, दो इनेलो के और तीन निर्दलीय विधायक हैं।
राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 31 विधायकों के वोट की जरूरत है, जिसके चलते बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के पास 1-1 सीट जीतने के लिए पूरी संख्या है। बीजेपी को अगर दोनों सीटें चाहिए तो उन्हें 10 और विधायक चाहिए होंगे। लेकिन चर्चा है कि तीसरा उम्मीदवार भी नामांकन भर सकता है। सूत्रों की माने तो हरियाणा के एक चर्चित नेता और पूर्व मंत्री निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भर सकते हैं और बीजेपी कांग्रेस को हराने के लिए निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दे सकती है। बीजेपी की बात की जाए तो किरण चौधरी फिर से राज्यसभा जाने की कोशिश में है। इसके साथ ही कुलदीप बिश्नोई के नाम की भी चर्चा जोरों पर है। अगर बीजेपी ने किसी अन्य जाट चेहरे पर दांव लगाया तो कैप्टन अभिमन्यु, ओमप्रकाश धनखड़ भी रेस में हो सकते है।
कौन रेस में आगे
वहीं कांग्रेस में भी मंथन तेज हो गया है। कांग्रेस के लिए दलित चेहरे के तौर पर डॉ. अशोक तंवर मजबूत दावेदार हैं। जाट चेहरे पर फैसला हुआ तो बृजेंद्र सिंह का नाम सबसे आगे रह सकता है। इसके अलावा वरिष्ठ नेता और हरियाणा के प्रभारी बीके हरिप्रसाद का नाम पर भी मंथन चल रहा है। बेशक कांग्रेस के लिए एक राज्यसभा सीट जीतना आसान लग रहा है। मगर पहले भी ऐसा हो चुका है जब कांग्रेस के पास संख्याबल होने के बावजूद उसके प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। जून 2016 में दो सीटों पर हुए चुनाव में एक सीट बीजेपी के बीरेंद्र चौधरी जीते थे और दूसरी सीट पर भी बीजेपी समर्थित व्यवसाई सुभाष चंद्रा आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीत गए थे। कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोक दल ने RK आनंद को समर्थन दिया था और दोनों के पास कुल 35 विधायक थे। मगर उस वक्त भी 14 कांग्रेस विधायकों के वोट अवैध करार हुए थे, जबकि एक INLD विधायक ने भी सुभाष चंद्रा के पक्ष में वोट किया था।
जून 2022 में भी दो राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन को हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के पास उस वक्त भी 31 विधायक थे। मगर बावजूद इसके बीजेपी और जेजेपी समर्थित आजाद उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा ने माकन को हराकर दूसरी राज्यसभा सीट भी जीत ली थी। एक सीट पर बीजेपी के कृष्ण लाल पंवार जीत थे। गुटबाजी से उलझ रही हरियाणा कांग्रेस के लिए मार्च में दो सीटों पर होने जा रहे राज्यसभा चुनाव भी चुनौती बन सकते हैं। लेकिन इस बार कांग्रेस ने दावा किया है कि उनके सभी विधायक एकजुट हैं और राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर जीत तय है।
