भुवनेश्वर : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के प्रकोप की घोषणा के बाद भारत के विभिन्न एयरपोर्ट पर सतर्कता बरती जा रही है। इसी बीच भुवनेश्वर हवाई अड्डे पर स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। स्क्रीनिंग में लगे अधिकारी संभावित जोखिम कारकों का पता लगाने के लिए प्रत्येक यात्री के 21 दिनों के यात्रा इतिहास की गहन जांच कर रहे हैं।
प्रधान ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी इबोला स्क्रीनिंग दिशानिर्देशों के अनुसार हवाई अड्डे परिसर में आइसोलेशन और परीक्षण की व्यवस्था भी की गई है। बैंकॉक से एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान यहां हवाई अड्डे पर उतरी और उस देश से आने वाले यात्रियों पर कड़ी निगरानी रखी गई। सभी यात्रियों को तेज बुखार, बदन दर्द या असामान्य थकान जैसे किसी भी लक्षण की सूचना देने की सलाह दी जाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पीएचईआईसी) घोषित किए जाने के बाद, स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निगरानी बढ़ाने, अस्पतालों की।
क्या कहता है डब्ल्यूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में इबोला वायरस को बेहद खतरनाक बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आकलन स्तर को 'हाई' से 'वेरी हाई' (उच्चतम) श्रेणी में कर दिया है। हालांकि, संगठन का कहना है कि वैश्विक स्तर इसका खतरा कम है। डब्ल्यूएचओ ने इस प्रकोप और पड़ोसी देश युगांडा में मामलों की पुष्टि के बाद अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।
82 मामलों और 7 मौतों की पुष्टि
संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने शुक्रवार को बताया कि अब तक डीआरसी में 82 मामलों और 7 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा लगभग 750 संदिग्ध मामले और 177 संदिग्ध मौत भी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि युगांडा की स्थिति स्थिर है और वहां व्यापक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जैसी कार्रवाई प्रभावी साबित हो रही है।
मरीजों में इबोला का बंडिबुग्यो स्ट्रेन पाया गया है, जिसके लिए अभी तक कोई प्रभावी टीका उपलब्ध नहीं है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, मनुष्यों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने से पहले और समय की आवश्यकता है। संगठन ने पहले इबोला को 'अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित किया था, साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि ये महामारी के स्तर पर नहीं है।
इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण कई देशों की सरकारें अलर्ट मोड पर आ चुकी हैं। एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं, भारत सरकार और अफ्रीकी संघ ने इबोला के प्रकोप को देखते हुए चौथे इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट (आईएएफएस IV) को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है।
क्या है इबोला वायरस
इबोला एक संक्रामक रोग है जो चमगादड़ों से फैलता है और संक्रमित व्यक्तियों या जानवरों के शरीर के तरल पदार्थों या दूषित वस्तु के सीधे संपर्क में आने से फैलता है, और दुर्लभ मामलों में हवा के माध्यम से भी फैल सकता है। इसका ऊष्मायन काल (इंक्यूबेशन पीरियड) दो से 21 दिनों तक होता है, जिसमें शुरुआती लक्षणों में बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं, धीरे-धीरे ये गंभीर लक्षणों में बदल जाते हैं।
