5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने संसद में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A के प्रमुख प्रावधानों को निरस्त कर दिया था। इस फैसले के तहत जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया था। आज इस फैसले की 7वीं बरसी है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने की 7वीं बरसी के अवसर पर आज बुधवार (5 अगस्त) को ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अनुच्छेद 370 क्या था, इसे क्यों हटाया गया और बीते 7 वर्षों में जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या बदलाव आए हैं।
क्या था अनुच्छेद 370?
1947 में जब जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ, तब तत्कालीन परिस्थितियों के आधार पर भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 को अस्थायी प्रावधान के रूप में जोड़ा गया था। इसके तहत जम्मू-कश्मीर को अपना अलग संविधान, अलग झंडा और अलग प्रशासनिक व्यवस्था रखने का अधिकार मिला हुआ था। रक्षा, विदेश मामले, वित्त और संचार—इन चार विषयों को छोड़कर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कोई भी कानून राज्य में तब तक लागू नहीं हो सकता था, जब तक कि राज्य की विधानसभा उसे मंजूरी न दे दे। वहां भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह स्थानीय रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी।
अनुच्छेद 35A का संरक्षण
इसके तहत राज्य विधानसभा को यह तय करने का अधिकार था कि कौन 'स्थायी निवासी' है। गैर-स्थायी निवासियों को राज्य में जमीन खरीदने, सरकारी नौकरी पाने या राज्य की छात्रवृत्ति लेने का अधिकार नहीं था। अनुच्छेद 35ए, जो 1954 में अनुच्छेद 370 में जोड़ा गया एक अतिरिक्त प्रावधान था, जिसने राज्य के विधायकों को राज्य के स्थायी निवासियों के लिए विशेष अधिकार और विशेषाधिकार सुनिश्चित करने का अधिकार दिया। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के साथ ही अनुच्छेद 35ए भी समाप्त हो गया, जिससे गैर-कश्मीरियों को क्षेत्र में संपत्ति खरीदने की अनुमति मिल गई।
5 अगस्त 2019 को क्या फैसला लिया गया?
- 5 अगस्त 2019 को संसद ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 पारित किया।
- अनुच्छेद 370 के उन खंडों को समाप्त कर दिया गया जो राज्य को विशेष अधिकार देते थे।
- राज्या का दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन, पूर्ववर्ती राज्य को दो भागों में विभाजित कर दिया गया
- जम्मू और कश्मीर (विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश)
- लद्दाख (बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश)
5 अगस्त 2019 को हटाया गया था अनुच्छेद 370
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था। 2019 में इसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया था और नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए जम्मू-कश्मीर को तीन परिवारों द्वारा लूटे जाने का आरोप लगाया। शाह ने कहा था, अनुच्छेद 370 की आड़ में, तीन परिवारों ने वर्षों तक जम्मू-कश्मीर को लूटा। विपक्ष के नेता (गुलाम नबी आजाद) ने कहा कि अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को भारत से जोड़ा था, लेकिन यह सच नहीं है। महाराजा हरि सिंह ने 27 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। अनुच्छेद 370 1954 में लागू हुआ। अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था और भारत के बाकी हिस्सों के लोगों को पूर्व राज्य में भूमि खरीदने से रोक दिया था। इस अनुच्छेद ने जम्मू-कश्मीर के लिए कानून बनाने की संसद की शक्तियों को भी सीमित कर दिया था।
बीते 7 वर्षों में क्या-क्या बदला?
अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले 7 वर्षों में जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पूर्ण संवैधानिक एकीकरण यानी 'एक देश, एक विधान, एक निशान' मजबूती से उभरा है। अब पूरे देश की तरह जम्मू-कश्मीर में भी केवल भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया जाता है और भारत का संविधान पूरी तरह लागू है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना का अधिकार (RTI), शिक्षा का अधिकार (RTE) और अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण कानून अब बिना किसी बाधा के लागू होते हैं।
सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों को अधिकार
शरणार्थियों और हाशियाकृत समुदायों को अधिकार: पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों, वाल्मीकि समुदाय और गोरखा समाज के लोगों को, जो दशकों से वहां रह रहे थे लेकिन नागरिक अधिकारों से वंचित थे, उन्हें पहली बार डोमिसाइल (अधिवास) प्रमाण पत्र, जमीन खरीदने का अधिकार और मतदान के अधिकार मिले।
महिलाओं के अधिकार सुदृढ़: पहले अगर कोई कश्मीरी महिला राज्य के बाहर के व्यक्ति से शादी करती थी, तो उसके बच्चों को पैतृक संपत्ति का अधिकार नहीं मिलता था। अब यह भेदभाव खत्म हो चुका है।
सुरक्षा स्थिति और अलगाववाद पर लगाम
पत्थरबाजी और बंद पर विराम: 2019 से पहले घाटी में अलगाववादी समूहों द्वारा प्रायोजित हड़तालें और पत्थरबाजी आम बात थी, जो अब पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है।
आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख: आतंकवादी गतिविधियों और सीमा पार से होने वाली फंडिंग पर एनआईए (NIA) और राज्य जांच एजेंसी (SIA) के जरिए नकेल कसी गई है।
पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों में अभूतपूर्व उछाल
- सुरक्षा स्थिति सुधरने से पर्यटन क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिला है। श्रीनगर का ऐतिहासिक लाल चौक अब सामान्य जनजीवन, भारतीय पर्यटकों के भ्रमण और राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन का मुख्य केंद्र बन चुका है।
- चिनाब नदी पर विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज के निर्माण और रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से कनेक्टिविटी और व्यापार में बड़ा उछाल आया है।
जमीन खरीदने और निवेश के नए रास्ते
अनुच्छेद 35A खत्म होने के बाद अब भारत का कोई भी नागरिक या उद्योगपति कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जम्मू-कश्मीर में व्यापार, उद्योग या रिहायशी उद्देश्यों के लिए जमीन खरीद सकता है, जिससे निजी निवेश के रास्ते खुले हैं।
जम्मू-कश्मीर के लिए युगान्तकारी मोड़ साबित हुआ
कुल मिलाकर 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त करने का निर्णय जम्मू-कश्मीर के इतिहास में एक युगान्तकारी मोड़ साबित हुआ है। बीते 7 वर्षों (2019–2026) में जम्मू-कश्मीर का भारतीय संघ के साथ न केवल पूरी तरह से संवैधानिक एकीकरण हुआ है, बल्कि दशकों से अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित रहे पाकिस्तान शरणार्थियों, वाल्मीकि समुदाय और महिलाओं को सामाजिक व कानूनी न्याय मिला है।
घाटी में पत्थरबाजी और अलगाववादी हड़तालों के दौर की समाप्ति, सुरक्षा स्थिति में सुधार, रिकॉर्ड-तोड़ पर्यटन और नए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ने इस क्षेत्र में आर्थिक प्रगति की एक नई नींव रखी है। हालांकि, कड़े सुरक्षा उपायों और राजनीतिक बदलावों के बीच स्थानीय आकांक्षाओं, पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली और रोजगार जैसे विषयों पर चर्चा और चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। यह कदम जम्मू-कश्मीर को अशांति के दौर से बाहर निकालकर विकास और राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक बनकर उभरा है।